चेन्नई , जून 20 -- परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के तहत केन्द्र सरकार के उद्यम भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) ने 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (एफबीआर) विस्तार के लिए उद्योग भागीदारी सम्मेलन' का आयोजन किया।

शुक्रवार को इस उच्च स्तरीय आयोजन में प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों, प्रौद्योगिकी भागीदारों, उपकरण निर्माताओं और इंजीनियरिंग संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ आगे आये। भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख हितधारक सहयोगात्मक साझेदारी बनाने और भारत के परमाणु ऊर्जा विकास के अगले चरण के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करने के लिए एकत्र हुए।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाविनी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पीए सुरेश बाबू ने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) में उनके असाधारण योगदान के लिए औद्योगिक भागीदारों का आभार व्यक्त किया, जिसने हाल ही में परमाणु शृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत की है, जो भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक निर्णायक क्षण है।

भारत के प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) बेड़े और वीवीईआर कार्यक्रम के साथ अपने व्यापक अनुभव का हवाला देते हुए सीएमडी बाबू ने कहा कि कैसे घरेलू उद्योगों ने परमाणु क्षेत्र को बदल दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि अतीत की सफलताएं मजबूत घरेलू औद्योगिक क्षमताओं, परमाणु प्रतिष्ठानों और उद्योग भागीदारों के बीच करीबी तालमेल तथा गुणवत्ता व सुरक्षा के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता पर टिकी थीं। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एफबीआर कार्यक्रम के विस्तार और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऐसा ही साझेदारी-आधारित दृष्टिकोण बेहद जरूरी है।

पीएफबीआर देश की तकनीकी क्षमता और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी डिजाइन और इंजीनियरिंग से बनी यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करती है। देश जैसे-जैसे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, सतत विकास सुनिश्चित करने और देश के परमाणु ईंधन संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करने में एफबीआर कार्यक्रम का विस्तार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सम्मेलन में भारत के जलवायु लक्ष्यों के बारे में भी बताया, जिसमें उद्योग जगत के नेताओं ने शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन 2070 के लिए स्वच्छ, विश्वसनीय और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा प्राप्त करने के राष्ट्रीय उद्देश्य का समर्थन करने की प्रतिबद्धता भी दोहरायी।

बाद में, एक वृत्तचित्र में पीएफबीआर की उल्लेखनीय यात्रा को प्रदर्शित किया गया। भाविनी और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) के बोर्ड सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया और भविष्य के एफबीआर विस्तार की रूपरेखा तैयार की।

प्रतिभागियों ने कई प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की जैसे फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की नियोजित वृद्धि से उत्पन्न होने वाले नये अवसरों का पता लगाना, विदेशी निर्भरता कम कर अहम प्रणालियों और उपकरणों का स्थानीय स्तर पर निर्माण करना, आपूर्ति शृंखला और गुणवत्ता विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और सख्त गुणवत्ता आश्वासन लागू करना और परमाणु क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक उद्योगों के लिए टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर दीर्घकालिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

प्रतिभागियों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि देश के विस्तार पाते परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को प्रगतिशील नीतिगत पहलों और एक मजबूत नियामक ढांचे का अच्छा समर्थन प्राप्त है।

उद्योग जगत ने इस पहल का महत्वपूर्ण कदम के रूप में व्यापक स्वागत किया। यह परमाणु सुरक्षा प्रशासन ढांचे को मजबूत करता है, हितधारकों के विश्वास को बढ़ावा देता है और परमाणु क्षेत्र के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

भाविनी और उसके उद्योग भागीदारों, दोनों ने सहयोग को गहरा करने, क्षमता विकास में तेजी लाने और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी बनाने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता साझा की। ये प्रयास सीधे तौर पर एफबीआर कार्यक्रम के विस्तार का समर्थन करेंगे और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को मजबूत करेंगे।

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