लखनऊ , जुलाई 9 -- उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है और देशभर में बिकने वाले कुल ईवी में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य इसे अगले दो वर्षों में बढ़ाकर 25 से 30 प्रतिशत तक ले जाना है।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईवी सब्सिडी के लिए स्वीकृत आवेदनों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 241 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक 86,489 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सब्सिडी आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें 43 हजार से अधिक लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान भी किया जा चुका है।

विभाग के मुताबिक, दोपहिया, चारपहिया, ई-बस और ई-गुड्स कैरियर श्रेणी में 19 जुलाई 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच 15,091 आवेदन स्वीकृत हुए थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13,950 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 47,514 हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 241 प्रतिशत अधिक है। वहीं, एक अप्रैल 2026 से 22 जून 2026 तक महज ढाई महीने से भी कम अवधि में 9,934 आवेदन स्वीकृत हुए हैं।

सब्सिडी पाने वाले वाहनों में सबसे अधिक मांग इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रही है। अब तक 61,417 इलेक्ट्रिक दोपहिया, 24,959 चारपहिया, 104 ई-गुड्स कैरियर और नौ ई-बसों के लिए सब्सिडी आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।

प्रदेश सरकार की ईवी नीति का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। नीति आयोग की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। सरकार और विशेषज्ञों का अनुमान है कि 440 करोड़ रुपये की नई सब्सिडी व्यवस्था और बढ़ते बुनियादी ढांचे के कारण आने वाले वर्षों में यह हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। इनके लिए चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 2,316 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की मांग को देखते हुए प्रदेश में लगभग 38 हजार चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता होगी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश नवीकरणीय एवं ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (यूपीआरईवी) के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर नए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हाईस्पीड चार्जर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

प्रदेश सरकार ने ईवी सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। 14 अक्टूबर 2022 से लागू उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 के तहत विकसित पोर्टल upevsubsidy.in के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जा रही है। आवेदन के लिए आवेदक को पोर्टल पर लॉगिन बनाकर वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करनी होती है तथा बैंक विवरण, आधार कार्ड, आरसी, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। बहुस्तरीय सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है। आवेदक पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं।

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