जयपुर , जुलाई 31 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने देश की एकता, अखण्डता, स्वतंत्रता एवं संविधान की रक्षा युवाओं की भी जिम्मेदारी बताते हुए कहा है कि मेरा देश कमजोर न हो, यह भाव उनके मन, मस्तिष्क में होना चाहिए।

श्री देवनानी ने शुक्रवार को उदयपुर के मोहन लाल सुखाडिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित युवा एवं आन्तरिक सुरक्षा विषयक मोहन लाल सुखाडिया स्मृति व्याख्यान माला का यहां विधानसभा भवन से वर्चुअल शुभारम्भ किया और इस अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्र महान है। इसकी एकता, अखण्डता, स्वतंत्रता एवं संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी युवाओं की है। युवा देश का भविष्य के साथ वर्तमान भी है। युवाओं का सही दिशा में चलना राष्ट्र की आन्तरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बदलते दौर में राष्ट्र की बाहरी सुरक्षा के साथ आन्तरिक सुरक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। श्री देवनानी ने श्री सुखाडिया की जयन्ती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि वे राजस्थान के शिल्पी थे। लम्बे समय तक वे राज्य के मुख्यमंत्री रहे। श्री देवनानी ने युवा एवं आन्तरिक सुरक्षा विषय को वर्तमान सन्दर्भ में सामयिक और महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वर्तमान में युवाओं को साइबर सुरक्षा के योद्धा बनने की आवश्यकता है।

श्री देवनानी ने कहा कि युवा यदि सही दिशा में चलता है तो राष्ट्र को शिखर तक ले जा सकता है और यदि वहीं युवा भ्रम, भटकाव, असन्तोष, नकारात्मकता और विखण्डन के जाल में फंस जाये तो युवा शक्ति राष्ट्र के लिए चुनौती बन जाती है। उन्होंने कहा कि यदि युवा सजग है, उत्तरदायी है, समाज में विश्वास है तो आन्तरिक सुरक्षा अपने आप मजबूत होती जाती है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में खतरा विचारों के प्रदूषण से है। डेटा के दुरुपयोग से राष्ट्र को खतरा है। साथ ही डिजिटल मंचों पर चलने वाले मनोवैज्ञानिक युद्ध भी आन्तरिक सुरक्षा के लिए चुनौती है। आन्तरिक सुरक्षा की लडाई अब सीमा पर नहीं लोगों के मन, मस्तिष्क और मंच पर लड़ी जा रही है। इस लडाई में युवा ही सबसे आगे की पंक्ति में खड़ा है।

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