नयी दिल्ली , मई 07 -- भारत का अचल सम्पत्ति बाजार 2025 के 650 अरब डॉलर की तुलना में बढ़कर 2047 तक 5.8 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। यह अनुमान उद्योग मंडल फिक्की और बाजार अनुसंधान एवं परामर्श सेवा कंपनी(केपीएमजी) की एक रिपोर्ट में लगाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2034 तक 906 अरब डॉलर के नये घरों के निर्माण किये जाने की संभावना है और 2028 तक 410 लाख वर्ग फुट रिटेल कारोबार की नयी जगह का विकास हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार रियल एस्टेट क्षेत्र का तेजी से आधुनिकीकरण हो रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई) के अपनाने का स्तर 2023 के 5 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 91 प्रतिशत तक पहुँच गया था। यह रिपोर्ट 19वें फिक्की रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन में आज जारी की गयी है। इसका शीर्षक है- 'फिक्की-केपीएमजी रिपोर्ट - भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य की पुनर्कल्पना।'इसमें कहा गया है कि रियल एस्टेट क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें तकनीक तेज़ी से यह तय कर रही है कि संपत्तियों का विकास, विपणन और लेन-देन कैसे किया जाए।रियल एस्टेट रोज़गार सृजन, पूंजी निर्माण और शहरी विकास में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में यह बाजार विशाल संभावनाओं से भरपूर है और 2047 तक बढ़ कर 5.8 ट्रिलियन (5.8 लाख करोड़ डॉलर )से भी ऊपर पहुंचने की क्षमता रखता है।
सम्मेलन में दिल्ली रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष आनंद कुमार ने सभी हितधारकों से भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र को अधिक मजबूत बनाने, इसके विकास में तेज़ी लाने और परिचालन दक्षता में सुधार करने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के बीच रेरा अधिनियम के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
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