देवरिया, जुलाई 12 -- उत्तर प्रदेश के देवरिया में 14 जुलाई को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवतावाद के विचारों पर आधारित 'मानवतावादी अर्थव्यवस्था' विषयक पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया है।

रविवार को यहां कार्यक्रम संयोजक एवं देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने बताया कि एकात्म मानवतावाद के विचार विकसित भारत के निर्माण का नया रास्ता दिखाते हैं। उनके अनुसार देश की अर्थव्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यह व्यवस्था समाजवाद और पूंजीवाद दोनों से अलग है, क्योंकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान मानव और पर्यावरण को दिया गया है।

सांसद श्री त्रिपाठी ने कहा कि एकात्म मानवतावाद का संदेश है कि मानव और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए विकास का मार्ग ऐसा हो जो प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करे और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करे। जब आर्थिक प्रगति, सामाजिक संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ बढ़ते हैं, तभी विकास वास्तव में मानवीय और स्थायी बनता है। उन्होंने कहा कि मानवतावादी अर्थव्यवस्था का उद्देश्य हर व्यक्ति की छिपी हुई क्षमता को पहचानकर उसे अवसर देना है। इसी सोच के साथ देवरिया लोकसभा क्षेत्र में 'अमृत प्रयास' के माध्यम से मानवतावादी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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