देवरिया , सितंबर 03 -- पंचायती राज एवं बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में उत्तर प्रदेश में देवरिया विकास खंड की ग्राम पंचायत पिपरा चंद्रभान में स्थापित गोवर्धन बायोगैस प्लांट 'कचरे से कंचन' की अवधारणा को साकार कर रहा है।

ग्राम पंचायत पिपरा चंदभान की गौशाला में स्थापित 85 घन मीटर क्षमता वाले इस बायोगैस प्लांट में करीब 286 गोवंश से प्राप्त गोबर का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद तैयार की जा रही है। यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन गई है।

गौशाला से प्रतिदिन एकत्र होने वाले गोबर को बायोगैस संयंत्र के इनलेट टैंक में डाला जाता है। इसके बाद ऑटो मिक्सिंग टैंक और डायजेस्टर के माध्यम से जैविक प्रक्रिया द्वारा बायोगैस तैयार होती है। संयंत्र से उत्पादित गैस को पाइपलाइन के माध्यम से ग्राम पंचायत के कंपोजिट विद्यालय तक पहुंचाया जा रहा है।जहां इसका उपयोग मिड-डे मील तैयार करने में किया जा रहा है। विद्यालय में अध्ययनरत करीब 170 बच्चों के लिए इसी स्वच्छ ऊर्जा से भोजन तैयार हो रहा है।

बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी को सुखाकर उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार की जाती है। इसे किसानों को 5 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद मिल रही है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो रही है।बायोगैस प्लांट ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विद्यालय द्वारा गैस के उपयोग के एवज में प्रतिदिन 80 रुपये का भुगतान किया जाता है। अब तक गैस की बिक्री से करीब 11,740 रुपये तथा जैविक खाद की बिक्री से करीब 14,301 रुपये की आय अर्जित की जा चुकी है। परियोजना से ग्राम पंचायत को विभिन्न मदों में अब तक कुल करीब 46,241 रुपये की आय प्राप्त हुई है।

प्लांट के संचालन एवं देखरेख के लिए स्थानीय स्तर पर ऑपरेटर की तैनाती की गई है। गौशाला में कार्यरत कर्मियों द्वारा गोबर संग्रहण, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है। इस प्रकार परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। कंपोजिट विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि बायोगैस प्लांट से नियमित रूप से गैस की आपूर्ति मिल रही है। इससे मिड-डे मील तैयार करने में काफी सुविधा हो रही है। साथ ही, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व की जानकारी भी मिल रही है।

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