सहारनपुर , अप्रैल 19 -- उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर णमोकार महामंत्र जैन सभा (पंजीकृत) देवबंद की ओर से मंदिर परिसर में प्रातःकाल भक्तांमर विधान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। शांतिधारा की बोली अंकित कुमार अविरल जैन ने प्राप्त की।

इसके बाद भक्तांमर विधान के मंडल पर पांच कलश स्थापित करने की बोलियां क्रमशः श्रीमती सविता जैन, श्रीमती नीलिमा जैन, श्रीमती नूतन जैन, श्रीमती ऊषा जैन तथा श्रीमती जूही जैन ने प्राप्त कीं, जबकि दीप स्थापना की बोली श्रीमती अर्चना जैन ने ली।

बोलियों के उपरांत नित्य-नियम पूजा तथा भक्तांमर विधान पूजा संपन्न कराई गई।

सभा के संस्थापक अंकित जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया जैन धर्म में अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक दिवस है। यह पर्व प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के वर्षीतप के पारणे की स्मृति में मनाया जाता है। इसी दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को इक्षुरस का आहार कराया था।

सभा के अध्यक्ष अंकित जैन ने कहा कि आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तांमर स्तोत्र के 48 काव्यों के माध्यम से भगवान आदिनाथ की स्तुति की जाती है। यह विधान आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और कष्टों के नाश के लिए किया जाता है।

महामंत्री ऋषभ जैन ने बताया कि भगवान आदिनाथ को एक वर्ष, एक माह और 13 दिन के उपवास के बाद पहला आहार प्राप्त हुआ था, जिसकी स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

कोषाध्यक्ष डॉ. पारस जैन ने बताया कि रात्रि में श्रीजी की आरती, भक्तांमर अनुष्ठान तथा धार्मिक तंबोला का आयोजन भी किया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित