नयी दिल्ली/देवप्रयाग , मई 18 -- संस्कृत के अध्येताओं, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को आधुनिक एवं सुगम पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 'एक विश्वविद्यालय एक पुस्तकालय' (वन यूनिवर्सिटी वन लाइब्रेरी सिस्टम) व्यवस्था शुरू की है, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय के सभी परिसरों को एकीकृत डिजिटल पुस्तकालय प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

उत्तराखंड के देवप्रयाग में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने सोमवार को इस व्यवस्था की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने एकीकृत पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली (आईएलएमएस), स्वचालित पुस्तकालय सेवाओं, मानकीकृत पुस्तक स्टैक क्षेत्र तथा 'अनुसंधान सहायता सेवा अनुभाग' (रिसर्च सपोर्ट सेल) का भी लोकार्पण किया।

प्रो. वरखेडी ने इस मौके पर कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पुस्तकों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि ज्ञान को प्रत्येक विद्यार्थी, जिज्ञासु और शोधार्थी तक सहज रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि क्लाउड आधारित आईएलएमएस प्रणाली तथा 'वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन' के अंतर्गत उपलब्ध ई-संसाधन विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शोध सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि 'ज्ञानवाहिनी' मोबाइल ऐप के माध्यम से संस्कृत का विशाल ज्ञान-संसार अब प्रत्येक स्मार्टफोन तक पहुंचेगा, जिससे अध्ययन और शोध को नई गति मिलेगी।

परिसर निदेशक प्रो. पी. वी. बी. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि 'रिसर्च सपोर्ट सेल' समावेशी शिक्षा की दिशा में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण पहल है। इसके अंतर्गत बहुभाषी अनुवाद सुविधा विकसित की गई है, जिससे भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के ग्रंथों का परस्पर अनुवाद संभव होगा। साथ ही, दिव्यांग पाठकों के लिए संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं के ग्रंथ ऑडियो बुक्स के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. पी. एम. गुप्ता ने बताया कि देवप्रयाग से शुरू की गई यह डिजिटल व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय के सभी परिसरों में लागू की जाएगी। नई प्रणाली के तहत पाठक 24 घंटे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पुस्तकें खोजने, आरक्षित करने और नवीनीकरण जैसी सुविधाओं का लाभ घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल संस्कृत शिक्षा एवं अनुसंधान को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ज्ञान-सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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