देवघर , मार्च 03 -- झारखंड के देवघर जिले स्थित प्रसिद्ध बैधनाथ धाम में मंगलवार को परंपरा के अनुसार हरिहर मिलन और होलिका दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चंद्रग्रहण को देखते हुए देवघर के बैद्यनाथ धाम मंदिर के तीर्थ पुरोहितों ने सूतक लगने से पहले ही हरिहर मिलन और होलिका दहन कार्यक्रम पूरा कर किया। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा पूरा मंदिर परिसर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों के गूंज उठा।
परंपरिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही बैद्यनाथ धाम में बाबा भोलेनाथ स्थापित किये गये थे। बाबा बैद्यनाथ पर गुलाल अर्पित करने के साथ बीते सोमवार से बाबा नगरी देवघर में होली की शुरुआत हुई। मंदिर के सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर की और भक्ति और उल्लास का ऐसा समा बंधा कि पूरा मंदिर परिसर रंगों और हर महादेव के जयकारों से गूंजायमान हो उठा। इसके बाद पूरी रात मंदिर का पट खुला रहा तथा दूर-दराज से भारी तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर दर्शन किए। हालांकि इस दौरान आम श्रद्धालुओं को शिवलिंग स्पर्श की अनुमति नहीं थी। इसके साथ ही देर रात बाबा नगरी में अल सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होलिका दहन किया।
इसके बाद सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा, पुजारी राकेश झा, पुरोहित आदि गर्भगृह में प्रवेश किए और शिवलिंग की विधिवत सफाई कर मलमल के कपड़े से उसे पोंछा गया। फिर सरदार पंडा ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत की।
परम्परा के अनुसार गुलाल अर्पण के बाद राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान कृष्ण और राधारानी को फगडोल पर विराजमान कराया गया। मंदिर के टहलुआ और भंडारी टीम ने फगडोल को कंधे पर उठाया और जय कन्हैया लाल की, मदन गोपाल की जय के नारों के बीच फगडोल मंदिर की परिक्रमा करते हुए पश्चिम द्वार से शोभा यात्रा निकली गयी। इस यात्रा के दौरान रास्ते में सड़कों और मुहल्लों में पहले से प्रतीक्षारत श्रद्धालुओं ने भगवान पर गुलाल अर्पित कर नमन किया। हर चौक-चौराहे पर फगडोल रुकता रहा और भगवान को मालपुआ का भोग लगाया गया।
मुख्य बाजार से गुजरते हुए फगडोल आजाद चौक स्थित दोल मंच पर पहुंचा। जहां पूरी रात भगवान कृष्ण और राधा को झुलाने की परंपरा निभाई गयी। इसके बाद अल सुबह होलिका दहन। फिर हरिहर मिलन तय तिथि के अनुसार, मंगलवार अल सुबह दोल मंच पर पुजारी ने करीब साढ़े चार बजे होलिका पूजन किया और निर्धारित समय सुबह 5:11 बजे होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद भगवान हरि और राधा को दोबारा फगडोल पर सवार कर मंदिर लाया गया। इस बार फगडोल बाबा मंदिर के पूरब द्वार से प्रवेश किया गया। मंदिर प्रवेश होते ही राधारानी को भगवान के मंदिर में और भगवान हरि को सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा की मौजूदगी में गर्भगृह में हरि और हर का मिलन कराया गया।
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