बड़वानी , फरवरी 21 -- प्रदेश भर में जहां कक्षा पांचवीं की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, वहीं बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत देवगढ़ ग्राम पंचायत के खेड़ी फलिया में 82 बच्चे पूरे शैक्षणिक सत्र में स्कूल और पढ़ाई से दूर रहे। इनमें से कई बच्चे परीक्षा में भी शामिल नहीं हो सके।

जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित इस आदिवासी बस्ती में करीब 40 परिवार निवास करते हैं। यहां 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 82 बच्चे हैं, लेकिन गांव में कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है। स्कूल की सुविधा न होने से बच्चे दिनभर जंगल में मवेशी चराने, खेती-किसानी में सहयोग करने या पारंपरिक खेल खेलने में समय बिताते हैं।

ग्रामीण मोहन और किराशा के अनुसार निकटतम प्राथमिक विद्यालय लगभग चार किलोमीटर दूर है। वहां तक पहुंचने का रास्ता घने जंगल और नाले से होकर गुजरता है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक जोखिम भरा हो जाता है। जंगली जानवरों के भय और सुनसान रास्ते के कारण अभिभावक छोटे बच्चों को स्कूल भेजने से हिचकते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चे कभी स्कूल में नामांकित ही नहीं हुए, जबकि कुछ ने दूरी और असुरक्षा के कारण पढ़ाई छोड़ दी। गांव में प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग कई बार जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

बताया गया कि कुछ बच्चे कक्षा पांच में पंजीकृत थे, लेकिन पूरे वर्ष स्कूल नहीं जा पाने के कारण वे परीक्षा की तैयारी नहीं कर सके और शुक्रवार से शुरू हुई परीक्षा में शामिल नहीं हुए।

पाटी विकासखंड के बीआरसी दिनेश चौहान ने बताया कि 18 फरवरी को इस संबंध में रिपोर्ट जिला परियोजना समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान बड़वानी को भेजी गई है, जिसमें 82 बच्चों के शिक्षा से वंचित रहने का उल्लेख है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बच्चों को बोकराटा स्थित आश्रम स्कूल में आवासीय सुविधा का विकल्प दिया गया था, लेकिन अभिभावकों ने सुरक्षा कारणों से इसे स्वीकार नहीं किया।

प्रभारी जिला परियोजना समन्वयक एवं प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अशरफ खान ने कहा कि मामला संज्ञान में है। कई बच्चे नामांकित हैं, लेकिन दूरी और असुरक्षित मार्ग के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वार्षिक कार्ययोजना में परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शामिल किया जा रहा है। जिले के दो-तीन अन्य स्थानों पर भी ऐसी स्थिति की जानकारी मिली है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि खेड़ी फलिया के बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिल सके और वे नियमित रूप से कक्षाओं तक पहुंच सकें।

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