चंडीगढ़ , सितंबर 22 -- पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने दूरसंचार आयोग के विघटन से स्पेक्ट्रम के मूल्य निर्धारण पर वित्तीय निगरानी कमजोर होने का दावा करते हुए मंगलवार को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को पत्र लिखा है।

उन्होंने दूरसंचार और डिजिटल नियामकों के बीच समन्वय के लिए सचिवों की एक समिति गठित करने का सुझाव दिया है।

श्री सिद्धू के अनुसार, 37 वर्ष पुराने डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन, जिसे पहले दूरसंचार आयोग कहा जाता था, के विघटन से स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण पर वित्त सदस्य की जांच की व्यवस्था समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व के प्रमुख स्रोतों में शामिल है, इसलिए इसके मूल्य निर्धारण में वित्त मंत्रालय की सहमति की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने समिति से करीब 90 दिन में वैकल्पिक संस्थागत व्यवस्था पर विचार करने का आग्रह किया है। उनके प्रस्ताव में स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण में वित्तीय सहमति की व्यवस्था, दूरसंचार एवं डिजिटल नियामकों की स्थायी समन्वय परिषद, सरकारी उपयोग वाले स्पेक्ट्रम का नियमित ऑडिट, नियामकों को मंत्रालयों द्वारा जारी नीतिगत निर्देशों का कारण सहित प्रकाशन और नियामकीय पदों को रिक्त होने से पहले भरने की समय-सारणी शामिल है।

श्री सिद्धू ने कहा कि दूरसंचार, डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और विमानन से जुड़े विभिन्न नियामकों के बीच औपचारिक समन्वय मंच की आवश्यकता है। उन्होंने एकल 'सुपर नियामक' बनाने के बजाय विभिन्न नियामकों के बीच परस्पर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त 2026 तक डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई थी। केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन को भंग करने की मंजूरी दी थी और संबंधित प्रस्ताव 19 सितंबर को जारी किया गया।

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