तिरुवनंतपुरम , फरवरी 22 -- केरल ने दूध उत्पादन में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और वर्तमान में राज्य में प्रतिवर्ष 25.27 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हो रहा है।
पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री जे. चिंचुरानी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य वर्ष 2031 तक दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।
सुश्री चिंचुरानी ने कहा कि 2031 तक व्यापक कार्ययोजना के तहत प्रति गाय की औसत उत्पादकता में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, ताकि डेयरी क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार आधुनिक प्रजनन तकनीकों को अपनाएगी और बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले मवेशियों का विकास किया जाएगा। उन्नत तकनीक से तैयार किए गए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन किसानों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होगा और दूध उत्पादन बढ़ेगा।
सुश्री चिंचुरानी ने बताया कि पशुओं के समय पर उपचार के लिए राज्य के सभी ब्लॉकों में पशु चिकित्सा एम्बुलेंस स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, पूरे राज्य में हीफर पार्क स्थापित किए जाएंगे, ताकि डेयरी किसान सब्सिडी के साथ उच्च गुणवत्ता वाली गायें खरीद सकें। किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए एक व्यापक बीमा योजना भी लागू की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित हरित धारा और टैमरिंड प्लस एंटी-मीथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट्स पर्याप्त मात्रा में डेयरी किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पर्यावरण अनुकूल पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि अनुसंधान केंद्र का निर्माण 80 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, जबकि पहले चरण में 15 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रारंभिक चरण में इस केंद्र में लगभग 200 गायों का पालन किया जाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित