बलरामपुर , मार्च 07 -- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध की शिकार महिला को न्याय दिलाने के बजाय गांव की पंचायत ने उसे और उसके पूरे परिवार के लिए मुर्गा बकरा बतौर जुर्माना दिया जाए का फैसला दिया है, गांव के सरपंच ने पीड़िता के परिवार को 12 साल तक समाज से बहिष्कृत रखने का आदेश जारी कर दिया, है। इस फैसले से पीड़ित परिवार सदमे और भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
एसडीएम नीरनिधि से आज मिली जानकारी के अनुसार,यह मामला जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के अंतर्गत बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव की एक महिला के साथ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म की घटना हुई थी और वर्तमान में पीड़िता गर्भवती है। जब पीड़िता के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ बसंतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने की पहल की, तो गांव में सरपंच की अगुवाई में पंचायत बुलाई गई। पीड़िता के शिकायत के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पीड़िता के परिजनों ने बताया कि आरोपी के जेल जाने के बाद गांव में दोबारा बैठक हुई, जिसमें सरपंच और कुछ ग्रामीणों ने पीड़िता और उसके परिवार को ही इस पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ सामाजिक दंड का फैसला सुना दिया है। परिवार का आरोप है कि पंचायत के इस फैसले के तहत उन्हें 12 साल तक गांव के सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक कार्यक्रमों से दूर रहने को कहा गया है। इस बहिष्कार के आदेश ने पहले से ही आघात झेल रहे परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि पंचायत ने पीड़िता के परिवार के सामने कुछ अपमानजनक शर्तें रखी हैं। परिजनों के मुताबिक, सरपंच ने कहा कि यदि पीड़िता का परिवार अपनी कथित "गलती" स्वीकार कर लेता है, तो उन्हें गांव के लोगों के पैर धोने होंगे और उसी पानी से नहलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सामाजिक दंड के तहत पूरे गांव को बकरा और शराब देने की भी शर्त रखी गई है।
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