नयी दिल्ली , मई 05 -- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दुर्लभ रोगों के निदान के प्रयासों को और सुदृढ़ करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा शीघ्र निदान सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराते हुए इसको लेकर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें कहा गया कि सरकार का लक्ष्य लोगों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

मंत्रालय ने सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इस विषय पर मंगलवार को यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस सम्मेलन का मक़सद देश में दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को सुलभ, किफायती और बेहतर उपचार प्रदान कर इस क्षेत्र में हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना है। उनका कहना था कि दुर्लभ बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नवाचार, प्रारंभिक पहचान और सुदृढ़ सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने भारत-विशिष्ट मॉडल, संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वदेशी नवाचार पर बल देते हुए कहा कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से शीघ्र निदान में सुधार संभव है। उन्होंने किफायती उपचार, दवाओं के पुनःउपयोग और जीन थेरेपी में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने शीघ्र निदान, स्क्रीनिंग के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न स्तरों पर बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में जीनोमिक तकनीकों, अनुसंधान सहयोग और रोगी-केंद्रित देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

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