रांची , अक्टूबर 09 -- झारखंड की राजधानी रांची में कई जिलों में दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का सहारा लेने की तैयारी कर रही है।

इस बार पूजा पंडालों से लेकर भीड़भाड़ वाले चौक-चौराहों तक पुलिस की नजर केवल सीसीटीवी कैमरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एआई की मदद से भीड़ का आकलन करने, रिकॉर्ड में दर्ज संदिग्धों की पहचान करने और लापता बच्चों को खोजने का प्रयास किया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित तकनीक से भीड़भाड़ वाले इलाकों की निगरानी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। इसके जरिए भीड़ का दबाव बढ़ने वाले स्थानों की पहचान कर जरूरत के मुताबिक पुलिस बल की तैनाती और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने में सहूलियत होगी।

आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह ने एआई तकनीक के संभावित इस्तेमाल की जानकारी देते हुए बताया कि दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान पुलिस अधिकारियों से उपलब्ध एआई सॉफ्टवेयर और टैबलेट आधारित तकनीक का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में कंट्रोल रूम के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।

हालांकि, इस बार राज्य में कितने स्थानों पर एआई आधारित निगरानी की जाएगी और किन-किन जिलों में इसकी सुविधा उपलब्ध होगी, इसे लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रांची के अलावा धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल की तैयारी की गई है।

दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पंडालों, प्रमुख सड़कों और चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कई बार अचानक भीड़ बढ़ने से आवागमन बाधित होने और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो जाती हैं। ऐसे में एआई आधारित सिस्टम किसी क्षेत्र में मौजूद लोगों की संख्या का अनुमान लगाने और भीड़ के दबाव वाले स्थानों की पहचान करने में मददगार हो सकता है।

इससे पुलिस को यह तय करने में सहूलियत मिलेगी कि कहां अतिरिक्त जवानों की जरूरत है, किस मार्ग पर यातायात नियंत्रित करना है और किन स्थानों पर तत्काल निगरानी बढ़ानी चाहिए। समय पर मिलने वाली जानकारी भीड़ प्रबंधन की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

एआई तकनीक का एक महत्वपूर्ण इस्तेमाल फेस रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने की प्रणाली के रूप में हो सकता है। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है और संबंधित निगरानी प्रणाली में चेहरा पहचानने की सुविधा उपलब्ध है, तो कैमरे में कैद तस्वीर का रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। इससे पुलिस को संदिग्ध की पहचान के संकेत मिल सकते हैं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी क्षमता बढ़ सकती है।

पूजा पंडालों और मेलों में बच्चों के परिजनों से बिछड़ने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में एआई आधारित चेहरा पहचानने वाली तकनीक मददगार साबित हो सकती है। लापता बच्चे की तस्वीर उपलब्ध होने और कैमरों तथा संबंधित सिस्टम के बीच जरूरी तकनीकी समन्वय होने पर निगरानी फुटेज में उससे मिलती-जुलती तस्वीर तलाशने में सहायता मिल सकती है।

आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने बताया कि देवघर में श्रावणी मेले के दौरान एआई आधारित कंट्रोल रूम का बेहतर उपयोग किया गया था। इसकी मदद से भीड़ का आकलन करने, संदिग्ध अपराधियों की पहचान करने और लापता बच्चों को खोजने में सहायता मिली थी।

उनके मुताबिक, श्रावणी मेले के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल उपयोगी रहा और इससे भीड़ की निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिली। अब दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान भी इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

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