नारायणपुर , सितंबर 25 -- छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बसे डोंगरी गांव के बच्चों को अब प्रारंभिक शिक्षा के लिए आठ किलोमीटर का कठिन सफर तय नहीं करना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने 'स्कूल केईन्ता' के तहत गांव के गोटुल में वैकल्पिक प्राथमिक शाला शुरू की है, जिसमें प्रारंभिक रूप से 10 बच्चों का नामांकन किया गया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर ग्राम पंचायत जाटलूर के डोंगरी गांव में पारंपरिक माटी पूजा और स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ वैकल्पिक प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया गया।
डोंगरी गांव दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। गांव से पोषक प्राथमिक शाला हरवेल की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। यह मार्ग पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है और गांव तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से पैदल चलना पड़ता है। हरवेल से डोंगरी पहुंचने में करीब एक घंटा 45 मिनट लगते हैं, जिसमें लगभग एक घंटे तक पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई करनी पड़ती है। इन परिस्थितियों में छोटे बच्चों के लिए प्रतिदिन स्कूल पहुंचना मुश्किल था।
बच्चों की इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने गांव में संचालित गोटुल को वैकल्पिक प्राथमिक शाला के रूप में शुरू किया है। इससे बच्चों को गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा मिल सकेगी और उन्हें दुर्गम पहाड़ी रास्ते से आठ किलोमीटर दूर स्थित स्कूल तक नहीं जाना पड़ेगा।
शाला के शुभारंभ के दौरान संकुल समन्वयक जाटलूर, प्राथमिक शाला हरवेल के अतिथि शिक्षक, स्वयंसेवक और प्राथमिक शाला धोबे के शिक्षक मौजूद रहे। गांव के गायता, पटेल और अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में पारंपरिक माटी पूजा के बाद बच्चों का नामांकन किया गया।
ग्रामीणों ने गांव में ही शाला शुरू किए जाने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों और आवागमन की कठिनाइयों के कारण बच्चों की नियमित पढ़ाई चुनौती बनी हुई थी। वैकल्पिक शाला शुरू होने से बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़े रखने में मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन के अनुसार दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डोंगरी गांव में शुरू की गई वैकल्पिक प्राथमिक शाला इसी पहल का हिस्सा है।
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