नागपुर , मार्च 21 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि वर्तमान समय में दुनिया युद्ध के खतरे का सामना कर रही है और स्थायी समाधान के लिए संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
श्री राधाकृष्णन ने नागपुर के रेशीमबाग स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में आयोजित भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के समाधान के लिए सार्थक संवाद बेहद जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने चार दिवसीय युवा संसद के विषय 'भारतीय भाषाएं और विकसित भारत-2047' का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मंच युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, "जब दुनिया युद्ध के खतरे का सामना कर रही है, तब संवाद ही आगे बढ़ने का रास्ता है। युवा संसद हमें सम्मानजनक बहस, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने और चर्चा के माध्यम से समाधान निकालने का महत्व सिखाती है।" भाषाई विविधता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा, धर्म और संस्कृति से गहरा लगाव होता है, लेकिन दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा, "हर व्यक्ति अपनी मां, मातृभाषा और धर्म से प्रेम करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों का सम्मान न करें। जब हम अपनी मातृभाषा में बोलते हैं, तो हम क्षेत्रीय नहीं बल्कि मौलिक होते हैं।" उन्होंने कहा कि हर भाषा अपनी अलग विरासत लेकर चलती है और सभी मिलकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान बनाती हैं।
हाल की पहलों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने संविधान के तमिल और गुजराती में अद्यतन अनुवाद संस्करण जारी किए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि संविधान को विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार संविधान डोगरी और संथाली जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध कराया गया है, जो भाषाई विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संसद के बजट सत्र पर टिप्पणी करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सदन में रचनात्मक बहस हो रही है। उन्होंने कहा, "विचारों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें टकराव में नहीं बदलना चाहिए। संवाद के माध्यम से निष्कर्ष तक पहुंचना ही उद्देश्य होना चाहिए। सार्थक बहसें विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगी और यह हर सांसद का कर्तव्य है।"उपराष्ट्रपति ने युवा संसद के प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे इस मंच से सीख लेकर एक मजबूत और सशक्त राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय का दौरा भी किया और संस्थापक के. बी. हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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