पटना , मई 03 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने रविवार को कहा कि दुनिया की जानकारी से जुड़े रहना शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसा करने के लिए लोगों के बीच अखबार पढ़ने जैसी आदतों को बढ़ावा देना चाहिए।

राज्यपाल श्री हसनैन ने आज ''बिहार एजुकेशन समिट'' में भाग लिया और इस अवसर कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और इस दौरान लोगों के आत्मविश्वास में वृद्धि से विकास के कई महत्वपूर्ण आयाम सामने आए हैं।

श्री हसनैन ने कहा कि बिहार के विकास की इस कहानी को देश और दुनिया में प्रभावी ढंग से पहुँचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी सार्थक होती है जब उसकी उपलब्धियाँ व्यापक रूप से साझा की जाएँ।



श्री हसनैन ने कहा कि बिहार की अपनी एक सभ्यता और विशिष्ट विरासत है। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र और मगध से ही भारतीय सभ्यता की नींव विकसित हुई। यह समृद्ध इतिहास बिहार को देश के सबसे सशक्त सांस्कृतिक केंद्रों में स्थापित करता है। उन्होंने इस बात की आवश्यकता पर जोर दिया कि बिहार की इस शक्ति को पहचान और प्रतिष्ठा भी मिले।

राज्यपाल ने कहा कि देश में अग्रिम पंक्ति के राज्यों में शामिल होने लिए बिहार को केवल आर्थिक निवेश ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और संस्थागत रुचि को भी आकर्षित करना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसे संस्थान विकसित करने चाहिए, जिनके विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व कर सकें। साथ ही, शिक्षा को केवल औपचारिक कक्षा-शिक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहिए।

श्री हसनैन ने कहा कि प्रौद्योगिकी, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नए अवसर प्रदान करती है, लेकिन बिहार की कला और संस्कृति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मधुबनी कला जैसी परंपराएँ अपने आप में एक सशक्त शिक्षा हैं।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में अनौपचारिक शिक्षा को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सामान्य शिक्षा के साथ सेमिनार, संगोष्ठी और संवाद आदि विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच भी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर जब लोगों को अपने विचार रखने का अवसर मिलता है, तो अद्भुत सोच सामने आती है।

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