रायपुर , अक्टूबर 19 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू करने की आज मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू नहीं कर पाती है, तो किसानों को कम से कम एक एकड़ के धान के बराबर अग्रिम राशि का भुगतान किया जाए, ताकि वे त्योहार मना सकें। उन्होंने धान खरीदी एक नवंबर से शुरू करने की मांग भी की।
बैज ने कहा कि दीपावली प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। यदि समय पर धान खरीदी नहीं होती है, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार किसानों को अग्रिम राशि का भुगतान करे और धान खरीदी शुरू होने पर इस राशि का समायोजन कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर कामगारों और कर्मचारियों को बोनस तथा अग्रिम भुगतान देने की परंपरा है, उसी तरह किसानों को भी राहत दी जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक नवंबर तक किसानों का धान खेतों से खलिहानों में पहुंचकर बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। इसके बावजूद सरकार ने अब तक धान खरीदी की तारीख घोषित नहीं की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी की जमीनी स्तर पर तैयारियां भी शुरू नहीं हुई हैं। बारदाने की व्यवस्था, सहकारी समितियों के खरीदी केंद्रों की तैयारियों और धान के परिवहन के लिए अनुबंध की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में समय पर खरीदी शुरू होने को लेकर किसानों में चिंता है।
बैज ने कहा कि पटवारियों की हड़ताल के कारण पंजीयन कार्य प्रभावित हो रहा है। फसल का भौतिक सत्यापन भी पीवी पोर्टल के माध्यम से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्यापन और पंजीयन कब पूरा होगा तथा धान खरीदी कब शुरू होगी। उनके अनुसार, इन अनिश्चितताओं के कारण किसान परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद से राज्योत्सव के अवसर पर धान खरीदी शुरू करने की परंपरा रही है। बैज ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने करीब 15 दिन की देरी से खरीदी शुरू की। उन्होंने आशंका जताई कि इस वर्ष भी खरीदी में देरी हो सकती है।
धान के समर्थन मूल्य पर बैज ने कहा कि वर्ष 2023 में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान का वादा किया गया था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में कुल 258 रुपये की वृद्धि की है। इस आधार पर उन्होंने किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि महंगाई के अनुपात में मौजूदा दर पर्याप्त नहीं है और किसानों को बढ़े हुए समर्थन मूल्य का लाभ मिलना चाहिए।
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