बैतूल , नवम्बर 3 -- दीपावली के बाद हुई बारिश से जिले में फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व में किए गए सर्वे में जो किसान छूट गए थे, उन्हें शामिल करते हुए पुनः सर्वे किया जाए, ताकि कोई भी किसान आर्थिक सहायता और बीमा क्लेम से वंचित न रहे।
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में फसल नुकसानी, खाद वितरण और मंडी व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके, विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे (आमला), चंद्रशेखर देशमुख (मुलताई), महेंद्र सिंह चौहान (भैंसदेही), कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी सहित कृषि, सहकारिता और मंडी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। विधायक गंगाबाई उईके (घोड़ाडोंगरी) वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुईं।
केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल सर्वे और बीमा कंपनी से इंटीमेशन की प्रक्रिया गंभीरता और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचे।
विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर तक विशेष अभियान चलाकर तीन दिनों में सर्वे कार्य पूर्ण किया जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि फसल बीमा योजना में कोई भी बीमित किसान क्लेम राशि से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि जिले में सवा लाख से अधिक किसान बीमित हैं, जिनका इंटीमेशन दर्ज कराया जा चुका है।
खंडेलवाल ने कृषि, जनपद और राजस्व विभाग के अमले को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर किसानों से संपर्क करें और तीन दिन के भीतर बीमा कंपनी के पोर्टल पर इंटीमेशन दर्ज कराएं। राजस्व विभाग को भी आरबीसी 6(4) के अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए पुनः सर्वे करने के निर्देश दिए गए।
विधायक डॉ. पंडाग्रे ने कहा कि राजस्व सर्वे और बीमा इंटीमेशन में कोई विसंगति न रहे, इसके लिए कृषि विभाग को बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करना चाहिए।
कलेक्टर सूर्यवंशी ने राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर तीन दिन में सर्वे पूरा कर प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराएं।
बैठक के अंत में विधायक खंडेलवाल ने कहा कि जिले में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। मंडियों में सोयाबीन, धान और मक्का की खरीदी मानक गुणवत्ता के अनुसार सुनिश्चित की जाए और भारसाधक अधिकारी नियमित निरीक्षण करें।
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