राजनीति दीपक मनोनीतपटना , अगस्त 5 -- बिहार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के नेता दीपक प्रकाश बुधवार को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया।

इस मनोनयन के साथ ही राज्य विधानमंडल के उच्च सदन में रिक्त हुई एक सीट को भरने की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

निर्वाचन आयोग ने आज देर शाम उनके मनोनयन की पुष्टि करते हुए अधिसूचना जारी की है।

बिहार के अपर सचिव-सह-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी माधव कुमार सिंह ने अधिसूचना में कहा कि प्रदेश के राज्यपाल अता हसनैन ने 31 जुलाई को मनोनीत सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद के लिए मनोनीत किया है।

रालोमो नेता श्री प्रकाश वर्तमान में राज्य के पंचायती राज मंत्री हैं। वह राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। श्री कुशवाहा बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने पिछले शुक्रवार को बिहार विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा था।

देवेश कुमार 17 मार्च 2021 से राज्यपाल की ओर से मनोनीत कोटे के तहत विधान परिषद के सदस्य थे और उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक निर्धारित था।

देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि रिक्त हुई सीट का इस्तेमाल पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजने के लिए किया जा सकता है। श्री प्रकाश को बिहार मंत्रिमंडल में छह महीने से ज्यादा हो गये थे और किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के कारण संवैधानिक नियमों के अनुसार उनके मंत्री पद पर बने रहने पर सवाल उठ रहे थे।

दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने का मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी विचाराधीन था। उनके मंत्री पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका में सवाल उठाया गया था कि संवैधानिक रूप से निर्धारित अवधि के भीतर राज्य विधानमंडल के लिए निर्वाचित या मनोनीत हुए बिना वह मंत्री पद पर कैसे बने रह सकते हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे, ने बिहार सरकार से जवाब मांगा था।

संविधान के प्रावधान के अनुसार, कोई व्यक्ति यदि विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे विधानमंडल के किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है।

दीपक प्रकाश ने इस वर्ष 7 मई को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इससे पहले वह 2025 में तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार में भी करीब पांच महीने तक मंत्री रहे थे।

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