पटना , अक्टूबर 25 -- िहार में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में जीविका की दीदी अधिकार केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, बल्कि घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, सामाजिक उत्पीड़न और पारिवारिक विवाद जैसी समस्याओं में आवश्यक परामर्श एवं सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।

बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके समुदाय के बीच ही ऐसा सुलभ मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं रख सकें और उनके समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। इसके माध्यम से महिलाओं की कानूनी सहायता, सामाजिक सुरक्षा और न्याय तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समस्याओं के समाधान में सहायता देने के उद्देश्य से प्रारंभ में पटना और मुजफ्फरपुर के दो प्रखंडों में दीदी अधिकार केंद्रों की स्थापना की गई थी। इन केंद्रों की उपयोगिता को देखते हुए अब राज्य के सभी 38 जिलों में लगभग 260 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, उत्पीड़न और अन्य सामाजिक समस्याओं से जुड़े मामलों में परामर्श, मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

जीविका के अधिकारियों के अनुसार, दीदी अधिकार केंद्रों के माध्यम से अब तक 51 हजार से अधिक महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक बन रही है।

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