पटना , अप्रैल 04 -- बिहार की राजधानी पटना में पहली बार अंत्येष्टि सेवाओं को अधिक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए गैस आधारित शवदाह गृह का निर्माण करने की योजना बनायी जा रहा है। नगर निगम की ओर से निर्माण किये जा रहे इस शवदाह गृह को एलपीजी गैस की मदद से संचालित किया जायेगा। इसी कड़ी में शनिवार को महापौर श्रीमती सीता साहू, नगर आयुक्त यशपाल मीणा की उपस्थिति में पटना नगर निगम एवं ईशा फाउंडेशन की अनुषंगी संस्था ईशा आउटरीच के बीच इस परियोजना को लेकर कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गये है।
इस शवदाह गृह के निर्माण कार्य के लिए पटना नगर निगम की ओर से आज नगर अभियंता बिन्दू रजक तथा ईशा आउटरीच की ओर से कायांत स्थानम के प्रमुख युवराजन ए ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित शवदाह गृह की संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण भी दी।
इस अवसर पर महापौर श्रीमती सीता साहू ने कहा कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक विधियों के बाद एलपीजी आधारित दाह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे अंत्येष्टि की प्रक्रिया धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुरूप पूरी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से दाह संस्कार में लकड़ी और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, लोगों को अधिक स्वच्छ, सम्मानजनक और व्यवस्थित अंत्येष्टि की सुविधा प्राप्त होगी।
इस मौके पर नगर निगम के नगर आयुक्त ने बताया कि समझौते के अनुसार ईशा आउटरीच द्वारा दीघा घाट पर एलपीजी आधारित आधुनिक शवदाह गृह का डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव किया जायेगा। बिहार सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए 2.11 एकड़ भूमि 33 वर्षों की अवधि के लिए मात्र 1 रुपये के सांकेतिक मूल्य पर लीज पर उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत चार एलपीजी फर्नेस, प्रतीक्षालय, प्रशासनिक भवन, आवश्यक उपयोगिता सुविधाएं, मंदिर तथा आकर्षक लैंडस्केपिंग की जायेगी। इससे न केवल अंत्येष्टि प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, बल्कि परिजनों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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