भोपाल , जुलाई 10 -- मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान शहर के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर हंगामा हो गया। कांग्रेस विधायकों आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने मास्टर प्लान लागू नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए बैठक की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के साथ तीखी नोकझोंक के बाद बैठक का बहिष्कार कर बाहर चले गए।

बैठक के दौरान कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जब तक भोपाल का मास्टर प्लान लागू नहीं होता, तब तक इस प्रकार की बैठकों का कोई औचित्य नहीं है। इसी दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद के बाद दोनों विधायक बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।

बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का शीघ्र लागू होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करेंगे।

बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से नाराजगी जताई। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के कई कार्यों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और बड़े व्यावसायिक भूखंडों का आकार कम करने की आवश्यकता है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने अलग से समीक्षा बैठक कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट सहित अन्य समस्याओं के समय पर निराकरण नहीं होने की बात उठाई। सांसद आलोक शर्मा ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक नोडल एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया।

बैठक में भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार प्राधिकरण के गठन का मसौदा राज्य सरकार को भेजा जाएगा तथा भोपाल को वेटलैंड शहर घोषित करने का आग्रह भी किया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित