नयी दिल्ली , नवंबर 20 -- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी ने गुरुवार को कहा कि कमी दिव्यांगजनों में नहीं बल्कि हमारी व्यवस्था में हैं, जो उन्हें बराबर अवसर नहीं देता। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता और सही नीयत से बड़ा बदलाव संभव है।
श्री जोशी ने यह बात यहां सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (सीएसओआई) में आयोजित 12वें नेशनल एबिलिम्पिक्स स्किल कॉम्पिटिशन (दिव्यांगों के लिये व्यवसायिक कौशल प्रतियोगिता )और विकलांगों के लिये आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
यह आयोजन देश में दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, कौशल विकास और मजबूत सहायता व्यवस्था बनाने पर काम करने वाले प्रमुख राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म के रूप में जाना जाता है। यह आयोजन सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट और नेशनल एबिलिम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएएआई) के संयुक्त में संयोजन में किया गया, जिसमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी), टीपीसीडीटी और इंडसइंड बैंक का सहयोग है।
नेशनल एबिलिम्पिक्स में 20 से अधिक राज्यों के 59 रीजनल मेडलिस्ट हिस्सा ले रहे हैं। ये प्रतिभागी 500 से अधिक क्षेत्रीय प्रतियोगियों में से चुने गए हैं।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, टाटा पावर के सीएचआरओ व चीफ़ सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी हिमल तिवारी ने भी भाग लिया।
इस समारोह में आईसीटी (इंजीनियरिंग डिज़ाइन, डीटीपी, फ़ोटोग्राफ़ी), क्राफ्ट्स (बास्केट मेकिंग, क्रोशिया, पेंटिंग एवं डेकोरेशन), हॉस्पिटैलिटी (केक डेकोरेशन, पेस्ट्री, क्लीनिंग सर्विसेज़) और सर्विसेज़ (हेयरड्रेसिंग, मसाज) जैसी विभिन्न कैटेगरी में प्रतिभागी अपना कौशल दिखा रहे हैं।
पहले दिन उद्घाटन समारोह में सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट ने मार्टसारथी नाम का नया नेशनल इंटरफ़ेस की घोषणा की , जिसके ज़रिए दिव्यांगजन बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर अपने उत्पाद और कौशल को आसानी से विनिमय कर सकते हैं।
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