बनासकांठा , अक्टूबर 30 -- देश के किसानों को दिवाली का तोहफा देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी करते हुए देश भर के 9.34 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए कुल 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके बैंक खातों में भेजी।

इस अवसर पर यहां आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट अब पांच गुना से अधिक हो गया है। पीएम किसान सम्मान निधि करोड़ों छोटे किसानों के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। इस किस्त के तहत अकेले गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों के खातों में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई है, जिसमें बनासकांठा के लाखों किसान परिवारों के खाते में पहुंचे करीब 50 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते वर्षों में सरकार की विभिन्न किसान-हितैषी नीतियों की वजह से किसानों को 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि या तो मिली है या उनकी बचत हुई है। उन्होंने इस संबंध में पांच प्रमुख योजनाओं और निर्णयों का विशेष उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के बैंक खातों में पहुंचे हैं। इसके अलावा यूरिया की बोरी 3,000 रुपये और डीएपी की बोरी 5,000 रुपये की पड़ती है लेकिन सरकार ने 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करके वही यूरिया की बोरी किसानों को 300 रुपये से कम में और डीएपी की बोरी साढ़े तेरह सौ रुपये में उपलब्ध कराई है।

श्री मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत, वर्तमान सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के वायदे को पूरी ईमानदारी से निभाया है। पिछले 12 वर्षों में गेहूं और धान किसानों को एमएसपी के रूप में 24 लाख करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में दिए गए हैं। किसानों को फसल बीमा योजना के तहत एक सशक्त सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। पिछले 10-12 वर्षों में खेती को नुकसान होने पर किसानों को फसल बीमा मुआवजे के रूप में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक मिल चुके हैं। सिंचाई पर किसानों की लागत को कम करने के लिए शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना और सोलर पंप योजना के तहत अब तक करीब 12 लाख सोलर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं। इससे न केवल बिजली और डीजल की भारी बचत हुई है, बल्कि किसानों को 80 करोड़ लीटर से अधिक डीजल खरीदने के खर्च से मुक्ति मिली है।

प्रधानमंत्री ने खेती को आधुनिक और लाभदायक बनाने के अन्य प्रयासों का भी जिक्र करते हुए बताया कि मिट्टी की सेहत जांचने के लिए अब तक 26 करोड़ से अधिक स्वाइल हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशी नस्लों के संरक्षणऔर वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए बनासकांठा में बने नए रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया गया है, जहांगीर, साहीवाल, कांकरेज, मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी देशी नस्लों का संरक्षण और गुणवत्ता सुधार होगा। कांकरेज नस्ल के लिए यह देश में अपनी तरह की पहली सुविधा है। इसके अलावा, मवेशियों के लिए देशभर में चलाए गए मुफ्त टीकाकरण अभियान के तहत अब तक करीब 1.5 अरब टीके आठ करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को लगाए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनाने के लिए बनास डेयरी जैसे संस्थानों के माध्यम से बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में आज दो नए बायो-सीएनजी प्लांट का शिलान्यासभी किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में मधुमक्खी पालन से देश में शहद का उत्पादन दोगुना हो गया है। इसके साथ ही, फल और सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत आज 12 नए क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं, जो टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको से जुड़े हैं। उत्तर गुजरात में मिले दो क्लस्टर से बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को भारी लाभ होगा।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2026 में पीएम-किसान योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसके लिए कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है। चौबीस फरवरी 2019 को शुरू की गई इस केंद्रीय योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में बैंक खातों में पहुंचाई जाती है। इस योजना के माध्यम से अब तक देशभर के परिवारों को कुल 4.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है, तथा केंद्रीय बजट 2026-27 में इसके लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

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