नयी दिल्ली , जुलाई 17 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु दिवस भारत की सांस्कृतिक विविधता, गौरवशाली परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
दिल्ली सचिवालय में आज तमिलनाडु दिवस के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भरतनाट्यम, कराकट्टम, कावड़ी अट्टम और कारागम जैसे पारंपरिक तमिल लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गयी। वर्षा की देवी मारी अम्मन और भगवान मुरुगन की आराधना पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर 20 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तमिलनाडु दिवस पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और देश के विकास में योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु दिवस भारत की सांस्कृतिक विविधता, गौरवशाली परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने अपनी समृद्ध भाषा, साहित्य, शास्त्रीय संगीत, भरतनाट्यम और अद्वितीय स्थापत्य कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलायी है। उन्होंने कहा कि राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, समुद्री व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और तमिलनाडु के बीच आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। बड़ी संख्या में तमिलनाडु के छात्र दिल्ली के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में आयोजित पोंगल, भरतनाट्यम और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को और सुदृढ़ कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि विविधता में एकता की भावना भारत को विकास और समृद्धि की नयी ऊंचाइयों तक ले जायेगी।
कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में सभी राज्यों के स्थापना दिवस और सांस्कृतिक आयोजनों का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तमिल उत्सवों, पर्वों और कर्नाटक संगीत जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी तमिल संस्कृति से जुड़ रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर, भगवान अयप्पा मंदिर, वेंकटेश्वर बालाजी मंदिर और देवी करुमरियम्मन मंदिर तमिल भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा प्रसार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।
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