नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- दिल्ली में बाढ़ और जलभराव की समस्या से निपटने तथा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 622 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है।
दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां हुई फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक में ये फैसले लिए गये। बैठक में यमुना के संवेदनशील हिस्से में 4.7 किलोमीटर लंबी प्रबलित सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) दीवार बनाने, नालों से निकलने वाली गाद के वैज्ञानिक निस्तारण और जल निकासी ढांचे को मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गयी।
बैठक में मैगजीन रोड नाले से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक यमुना के किनारे 99 करोड़ रुपये की लागत से 4.7 किलोमीटर लंबी आरसीसी दीवार बनाने को मंजूरी दी गयी। इस दीवार के निर्माण से यमुना का जलस्तर बढ़ने के दौरान संवेदनशील और निचले इलाकों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिलेगी। परियोजना का उद्देश्य बाढ़ के खतरे को कम करना और नदी के आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
दिल्ली के नालों से निकलने वाली गाद के निस्तारण के लिए 260 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बायोमाइनिंग परियोजनाओं को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी गयी। इन परियोजनाओं के तहत गाद का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और निस्तारण किया जाएगा। विशेष रूप से नजफगढ़ नाले सहित उन प्रमुख नालों पर ध्यान दिया जायेगा, जहां गाद का अधिक जमाव होता है।
अधिकारियों के अनुसार नालों की सफाई के बाद निकाली गयी गाद का उचित निस्तारण नहीं होने से वह कई बार सड़कों और नालों के किनारे जमा रहती है तथा बारिश के दौरान दोबारा नालों में पहुंच जाती है। इससे जल निकासी प्रभावित होती है और जलभराव की समस्या बढ़ती है।
बैठक में दिल्ली के विभिन्न नालों के किनारे बरापुला की तर्ज पर सौंदर्यीकरण और विकास कार्य कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके तहत नालों के आसपास पैदल चलने के रास्ते, हरित क्षेत्र, पौधारोपण, उचित प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए फेंसिंग विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य नालों के आसपास के उपेक्षित क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और जनोपयोगी स्थानों में बदलना है। साथ ही, इन क्षेत्रों में अतिक्रमण की आशंका को कम करने और शहरी वातावरण बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जायेगा।
श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि नालों से गाद निकालने का तब तक कोई लाभ नहीं है, जब तक उसका उचित निस्तारण नहीं किया जाता और वह दोबारा नालों में नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि बायोमाइनिंग परियोजनाओं के माध्यम से इस समस्या का स्थायी समाधान करने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के नाले गंदगी और बदहाली की पहचान बनने के बजाय बेहतर शहरी विकास का हिस्सा होने चाहिए। बरापुला की तर्ज पर अन्य नालों के किनारों को भी हरा-भरा, स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जायेगा।
उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। बैठक में जल निकासी व्यवस्था में सुधार, मानसून के दौरान बेहतर तैयारियों और बाढ़ प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से दिल्ली में जलभराव की समस्या कम करने, नालों की सफाई व्यवस्था सुधारने और बाढ़ के खतरे से निपटने की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित