नयी दिल्ली , सितंबर 04 -- राष्ट्रीय राजधानी के द्वारका ज़िला पुलिस की विशेष टीम ने कई राज्यों में फैले साइबर धोखाधड़ी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफ़ाश किया है। यह गिरोह कथित रूप से धोखाधड़ी से प्राप्त धन को कई बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित करता था। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार किया है और उनके पास से 109 चेक बुक, 12 मोबाइल फ़ोन और बैंक खातों व फ़र्मों से जुड़े कई दस्तावेज़ बरामद किए हैं।
द्वारका ज़िला पुलिस के अनुसार, इस गिरोह से जुड़ी धोखाधड़ी की कुल 89 शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें लगभग 83.23 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का शक है। ये शिकायतें तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ी हैं। पुलिस ने बताया कि समय पर कानूनी कार्रवाई करके 1,14,84,394 रुपये की राशि को रोक दिया गया है।
ये गिरफ्तारियां दिल्ली के द्वारका उत्तरी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(2), 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज एफआईआर मामलों में की गई हैं। जांच तब शुरू हुई जब पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर उपलब्ध साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों का विश्लेषण किया।
विश्लेषण के दौरान, जांचकर्ताओं ने द्वारका के सेक्टर 23ए स्थित यस बैंक में संचालित एक संदिग्ध बैंक खाते की पहचान की। पाया गया कि इस खाते में देश के विभिन्न हिस्सों से दर्ज कई साइबर-धोखाधड़ी शिकायतों में कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए प्राप्त रकम जमा हुई थी।
जांच के दौरान प्राप्त वित्तीय खुफिया जानकारी ने पुलिस को उन व्यक्तियों का पता लगाने में मदद की जो कथित रूप से धोखाधड़ी से प्राप्त संदिग्ध धनराशि को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने और निकालने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों और फर्मों का संचालन कर रहे थे।
पुलिस ने इस मामले में चेतन सहरावत, शक्ति गुर्जर, धर्मेंद्र कुमार, तरुण, दीपक और गौरव कादियान को गिरफ़्तार किया है। पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि वे एक संगठित गिरोह के सदस्य हैं। यह गिरोह धोखाधड़ी से प्राप्त धन प्राप्त करने, स्थानांतरित करने और निकालने के लिए अलग-अलग नामों से बैंक खाते और फ़र्म खोलने का काम करता है। जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी ऐसे लोगों के संपर्क में थे जिन्होंने कथित रूप से यस बैंक, फेडरल बैंक और स्टेट बैंक समेत कई बैंकों में फ़र्म और बैंक खाते खुलवाने में मदद की थी।
पुलिस के अनुसार, चेतन सहरावत कथित रूप से इस गिरोह का मुखिया था जबकि बाकी आरोपी उसके निर्देश पर काम करते थे। नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल किए गए खातों के बैंक लेनदेन की विस्तृत जांच से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन का पता चला। जांचकर्ताओं को पता चला कि चोरी के धन को कैश में निकालने से पहले कई बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया था। कई खातों में पैसे भेजने वाले और पाने वाले एक ही थे, जिससे पता चलता है कि साइबर धोखाधड़ी से मिली संदिग्ध रकम को इधर-उधर करने के लिए एक संगठित तरीका अपनाया जाता था।
कई कंपनियों के नाम भी बार-बार वित्तीय लेन-देन में सामने आए हैं और जांच अधिकारी उनकी भूमिका और संबंधों की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि सहरावत ने सह-आरोपी गौरव कादियान के साथ वित्तीय लेन-देन किया था और माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी लगभग 94,000 रुपये का लेन-देन किया था। आरोप है कि कंपनी के एक प्रतिनिधि ने शिशुपाल एंटरप्राइजेज और प्लेंटिवा ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अपने एसबीआई खाते में जमा किए गए कैश और आगे के लाभार्थियों की जानकारी दी।
जांच में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा एक संभावित पहलू भी सामने आया है। पूछताछ के दौरान, चेतन सहरावत ने कथित रूप से बताया कि वह यूएसडीटी और बायनेंस से जुड़ा लेन-देन में शामिल था।
जांचकर्ताओं ने ऐसे कई संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान की है, जिन्हें कथित रूप से अनजान लोगों को नौकरी या सैलरी अकाउंट देने के बहाने खुलवाया गया था। पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल बाद में साइबर धोखाधड़ी से हासिल प्राप्त रकम को को इधर-उधर घुमाने के लिए किया गया।
पुलिस ने बताया कि दो आरोपियों को देश छोड़ने की कथित कोशिश के दौरान 'लुक आउट सर्कुलर' की मदद से पकड़ा गया। आरोपी द्वारा इस्तेमाल की गई जगहों पर तलाशी के दौरान 12 मोबाइल फ़ोन, 109 चेक बुक, बैंक अकाउंट से जुड़े दस्तावेज़, फ़र्म रजिस्ट्रेशन के कागज़ात, पैन कार्ड और पहचान से जुड़े अन्य दस्तावेज़, कैश जमा स्लिप और गिरोह के कामकाज से जुड़े अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए गए।
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