नयी दिल्ली , जून 27 -- रोहिणी ज़िला दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने शनिवार को चोरी और छीने गए मोबाइल फ़ोन की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफ़ाश किया और इस सिलसिले में दो कूरियर संचालकों समेत 10 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और लगभग एक करोड़ रुपये की कीमत के 325 महंगे मोबाइल फ़ोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच से पता चला कि यह गिरोह चोरी के मोबाइल फ़ोन को दिल्ली से कोलकाता, मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बंगलादेश भेजता था, जबकि एक अन्य नेटवर्क इन डिवाइस को उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल भेजता था। पुलिस ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में रोहिणी में मोबाइल चोरी और झपटमारी के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद बरामदगी की दर असामान्य रूप से कम रही। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि चोरी हुए ज़्यादातर फ़ोन भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर कभी दोबारा चालू नहीं किए गये, जिससे एक संगठित सीमा-पार गिरोह के शामिल होने का संकेत मिलता है।
जांच के दौरान, पुलिस ने लगभग 200 अपराधियों के रिकॉर्ड की जांच की, सैकड़ों आदतन चोरों, झपटमारों और चोरी का सामान खरीदने वालों की प्रोफ़ाइल बनाई और पूरे नेटवर्क का पर्दाफ़ाश करने के लिए डिजिटल निगरानी मानव , ह्यूमन इंटेलिजेंस, कूरियर रिकॉर्ड, फ़ील्ड वेरिफिकेशन और तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल किया। यह अभियान 19 जून, 2026 को शुरू हुआ, जब पुलिस ने राजा उर्फ़ राजू, करण और गोविंद को गिरफ़्तार किया और 101 चोरी के मोबाइल फ़ोन बरामद किए। गोविंद से मिली कूरियर रसीद से जांचकर्ताओं को लगभग 200 चोरी के फ़ोन का पता चला जिन्हें पहले ही कोलकाता भेजा जा चुका था, जिससे इस बड़े रैकेट का अहम सुराग मिला।
पुलिस ने 23 जून को अजय कुमार और अली खान को गिरफ़्तार किया और 100 और चोरी के मोबाइल फ़ोन बरामद किए। आगे की जांच से पता चला कि रोहिणी के अवंतिका इलाके में एक किराए के फ़्लैट का इस्तेमाल चोरी के फ़ोन को रखने, छांटने, पैक करने और कूरियर सेवाओं के ज़रिए भेजने के लिए एक गोदाम के तौर पर किया जा रहा था। इसके बाद की छापेमारी में ऋषिकेश कुमार उर्फ़ डब्लू, संजीव कुमार, सनी कुमार उर्फ़ राहुल और अन्य साथियों को गिरफ़्तार किया गया, जिससे 124 और मोबाइल फ़ोन बरामद हुए और कुल बरामदगी 325 डिवाइस तक पहुँच गई।
जांच में दो कूरियर कंपनी संचालकों की भी भूमिका सामने आई, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 10 हो गयी है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लगभग एक साल से सक्रिय था और इस दौरान इसने चोरी के करीब 10,000 से 12,000 मोबाइल फोन बंगलादेश नेपाल भेजे। डिजिटल सबूतों और कूरियर रिकॉर्ड से बंगलादेश में मौजूद संदिग्ध मोबाइल प्राप्त कर्ताओं से भी संबंध का पता चला है। सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने और सीमा-पार नेटवर्क को खत्म करने की कोशिशें जारी हैं।
बरामद 325 मोबाइल फोन में से लगभग 150 फोन दिल्ली में चोरी, झपटमारी, डकैती और सेंधमारी के दर्ज मामलों से जुड़े पाए गए हैं। बाकी डिवाइस की जांच-पड़ताल चल रही है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, बरामद फोन उनके असली मालिकों को लौटा दिए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों पर संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से चोरी के मोबाइल फोन के अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और इससे सैकड़ों पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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