नयी दिल्ली , मई 29 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पैदा हुई अंदरूनी खींचतान का सीधा असर दिल्ली नगर निगम के कामकाज पर पड़ रहा है।
श्री यादव ने कहा कि वार्ड समितियों और स्थायी समिति के चुनाव पहले 23 मई से टालकर 3 जून किए गए और अब उन्हें अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है, जिससे विकास कार्य, सफाई व्यवस्था और लैंडफिल साइटों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले अटक गए हैं। वार्ड कमेटियों और स्थायी समिति का चुनाव टालना एमसीडी एक्ट की धारा 53(2) का उल्लंघन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना चेयरमैन की सहमति के चुनाव स्थगित करने का आदेश भाजपा नेतृत्व के दबाव में लिया गया। उनका कहना है कि भाजपा में गुटबाजी के कारण निगम प्रशासन प्रभावित हो रहा है और नए प्रदेश अध्यक्ष के करीबी नेताओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि संवैधानिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए जोनल उपायुक्तों को पीठासीन अधिकारी बनाकर चुनाव कराए जाएं। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति के गठन में देरी से सफाई, विकास परियोजनाओं और जनहित योजनाओं को मंजूरी मिलने में बाधा आएगी, जबकि मानसून से पहले नालों की सफाई तक शुरू नहीं हो सकी है।
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