नयी दिल्ली , फरवरी 12 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली सरकार ने 'मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना' मंजूरी दी जो दिल्ली के हजारों कारीगरों की जिंदगी बदलने का माध्यम बनेगी।
श्रीमती गुप्ता ने आज कहा कि दिल्ली सरकार ने 'मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना' को हरी झंडी दे दी गई। यह योजना दिल्ली के हजारों कारीगरों की जिंदगी बदलने का माध्यम बनेगी। दिल्ली के कारीगर हमारी सांस्कृतिक विरासत की असली ताकत हैं। वर्षों से वे अपने हुनर से समाज को समृद्ध करते आए हैं, लेकिन बदलते दौर में उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार से सीधा जुड़ाव भी चाहिए। यह योजना यह सुनिश्चित करेगी कि वे आधुनिक कौशल और डिजिटल बाजार तक पहुंच के साथ इस नए दौर में न केवल टिकें, बल्कि तरक्की भी करें।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाल में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल विकास को राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार बताया था। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी वित्त मंत्री ने कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर दिया है। दिल्ली सरकार उसी सोच को आगे बढ़ा रही है। हम कौशल को सीधे सम्मानजनक आजीविका से जोड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि योजना में 'रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल)' के माध्यम से पहले से काम कर रहे पारंपरिक कारीगरों के अनुभव और हुनर को प्रमाणित किया जाएगा। इससे उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर मिलेंगे और वे औपचारिक आर्थिक ढांचे से जुड़ सकेंगे। लाभार्थियों को मुख्यमंत्री प्रमाणपत्र और पहचान पत्र भी दिया जाएगा। साथ ही, उद्यम (एमएसएमई) पंजीकरण, ब्रांडिंग और ऋण संबंधी जानकारी में सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी, हथकरघा और ग्रामोद्योग से जुड़े कामगारों के लिए आत्मनिर्भरता का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अब उन्हें केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि डिजिटल मार्केट तक सीधी पहुंच भी मिलेगी। यह योजना केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि समग्र प्रयास है, जिसमें कौशल, तकनीक, बाजार और वित्तीय सशक्तिकरण को एकसाथ जोड़ा गया है। इससे दिल्ली के हजारों कारीगरों को नई पहचान, नई दिशा और नई संभावनाएं मिलेंगी।
दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह सिर्फ कौशल सिखाने की पहल नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों को सम्मान और आत्मनिर्भर बनने का मौका देने की कोशिश है।
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