अलवर , जुलाई 31 -- राजस्थान में अलवर में कभी बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने वाले जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे शिक्षक दिनेश कुमार चौधरी की जिंदगी बचाने के लिये शिक्षा परिवार आगे आया है।
अलवर के राजकीय प्रताप उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक दिनेश कुमार चौधरी इंटरस्टिशल लंग डिजीज (आईएलडी) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। वर्तमान में उनका इलाज सिकंदराबाद (तेलंगाना) स्थित केएलएमएस अस्पताल में चल रहा है, जहां चिकत्सकों ने उनकी जान बचाने के लिए तत्काल लंग प्रत्यारोपण की जरूरत बतायी है। इस जटिल उपचार पर करीब दो करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है, जो परिवार की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।
ऐसे कठिन समय में राजस्थान का पूरा शिक्षा विभाग अपने साथी के लिए संबल बनकर खड़ा हो गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने राज्य के तीन लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग का आह्वान किया है। निदेशक सीताराम जाट के आदेशानुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के जुलाई 2026 (देय अगस्त 2026) के वेतन से स्वैच्छिक रूप से 45 रुपये का अंशदान लिया जाएगा। जिन कर्मचारियों का वेतन बिल पहले ही कोषालय में भेजा जा चुका है, वे निर्धारित बैंक खाते में सीधे राशि जमा कर सकेंगे। इस योगदान को पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है और इच्छुक नहीं होने पर कर्मचारी अपने डीडीओ को लिखित सूचना दे सकते हैं।
महज 45 रुपये का यह छोटा-सा योगदान किसी के लिए सामान्य राशि हो सकती है, लेकिन तीन लाख से अधिक शिक्षाकर्मियों के जुड़ने पर यही सहयोग दिनेश कुमार चौधरी के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन सकता है। शिक्षक संगठनों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए इसे शिक्षा परिवार की संवेदनशीलता और एकजुटता का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि यह अभियान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मानवता का संदेश है कि संकट की घड़ी में शिक्षा विभाग अपने किसी भी साथी को अकेला नहीं छोड़ता।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित