बेंगलुरु , जनवरी 31 -- कर्नाटक के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ), दावोस में जानबूझकर किसी भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर नहीं करने का निर्णय लिया।
श्री पाटिल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने दावोस में एमओयू साइन न करने का सचेत फैसला किया, क्योंकि हम चाहते हैं कि निवेशक कर्नाटक आएं और यहां की संसाधन क्षमता, प्रतिभा भंडार और निवेश-अनुकूल नीतियों को स्वयं देखें।" उन्होंने बताया कि दावोस दौरे के दौरान राज्य सरकार ने वैश्विक और भारतीय कंपनियों, निवेशकों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ 46 द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में एयरोस्पेस, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, पेय एवं खाद्य प्रसंस्करण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
श्री पाटिल ने कहा कि यह रणनीति कर्नाटक के स्थानीय निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में सरकार के विश्वास को दर्शाती है।उन्होंने कहा, "बेंगलुरु हमेशा से नवाचार, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का केंद्र रहा है। हम चाहते हैं कि निवेशक विदेश में कागजों पर हस्ताक्षर करने के बजाय यहां आकर इस माहौल को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें।"उद्योग मंत्री ने निवेश आकर्षित करने में कर्नाटक के मजबूत रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में राज्य ने 10.7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हासिल किए थे, जिससे कर्नाटक देश के शीर्ष निवेश गंतव्यों में शामिल हो गया।
श्री पाटिल ने कहा कि कई राज्य विदेशों में एमओयू पर हस्ताक्षर को प्रचार का माध्यम बनाते हैं, जबकि कर्नाटक गंभीर और ठोस संवाद को प्राथमिकता देता है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की मजबूत अवसंरचना, नीति समर्थन और कुशल कार्यबल को देखने के बाद कई कंपनियों ने यहां निवेश स्थापित करने में रुचि दिखाई है।
उन्होंने संकेत दिया कि यह रणनीति भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संवादों के लिए एक मिसाल बन सकती है और अन्य राज्यों को भी वैश्विक मंचों पर प्रतीकात्मक घोषणाओं के बजाय जमीनी निवेश अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित