प्रयागराज , अक्टूबर 13 -- उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के दारागंज में मां काली के रौद्र स्वरूप के दर्शन के लिए सोमवार देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और भुजाली लिए मां काली के स्वरूप में कलाकार सड़कों पर निकले तो लोग उन्हें देखने के लिए ठहर गए। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के बीच कलाकार ने पारंपरिक नृत्य किया, जबकि सड़क किनारे खड़े श्रद्धालु दर्शन करते रहे।

दारागंज का काली स्वांग शहर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शामिल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है। इसमें कलाकार मां भगवती के काली स्वरूप को धारण कर नृत्य और अभिनय के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत करते हैं। श्रद्धालु इसे सांस्कृतिक आयोजन के साथ ही मां के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर भी मानते हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, काली स्वांग के दौरान मां काली अपने भक्तों को दर्शन देने निकलती हैं। इसी आस्था के चलते लोग देर रात तक आयोजन का इंतजार करते हैं और दर्शन के दौरान जयकारे लगाते हैं। काली स्वांग में कलाकार की वेशभूषा और हाव-भाव विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और भुजाली लेकर कलाकार मां के रौद्र स्वरूप को सड़कों पर साकार करता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर होने वाला पारंपरिक नृत्य पूरे माहौल को भक्तिमय बना देता है।

पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के अलावा लोक संस्कृति एवं पारंपरिक धार्मिक आयोजनों में रुचि रखने वाले लोग भी काली स्वांग देखने आते हैं।

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