पटना , जून 04 -- बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दाखिल-खारिज और परिमार्जन मामलों में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन्हें "डिफेक्ट चेक" के नाम पर लंबित नहीं रखा जाए। विभागीय जिलावार समीक्षा के तहत मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सारण, नवादा और भागलपुर जिलों के राजस्व कार्यों की छठे दिन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) हर माह एक दिन किसी शनिवार को राजस्व कर्मचारियों के साथ बैठक कर कार्यों की समीक्षा करें। साथ ही फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान को गति देने पर भी जोर दिया गया।

मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि दाखिल- खारिज से पहले सरकारी भूमि की सूची से अनिवार्य रूप से मिलान किया जाए, जिससे किसी भी स्थिति में सरकारी भूमि निजी नाम पर दर्ज न हो सके। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराना है। इसके लिए अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में ऐसे परिवारों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि कई मामलों में पात्र लाभुकों को अनफिट घोषित करने की शिकायतें मिली हैं, जिसकी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सहयोग शिविरों में प्राप्त आवेदनों की भी समीक्षा की गई और निर्देश दिया गया कि किसी भी आवेदन को अस्वीकृत करने से पहले आवेदक से संवाद जरूर किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगले 15 दिनों में लंबित मामलों के निष्पादन में उल्लेखनीय प्रगति दिखनी चाहिए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व सेवाओं को पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाना है।

बैठक में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं अंचल अधिकारी उपस्थित रहे। विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न राजस्व योजनाओं और पोर्टलों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश प्राप्त किए।

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