भोपाल , अक्टूबर 08 -- भोपाल जिला अदालत के दशम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दहेज मृत्यु और विवाहिता से क्रूरता के मामले में आरोपी पति सुनील रजक उर्फ गब्बर को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को दहेज प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में भी कारावास और जुर्माने से दंडित किया है। सत्र प्रकरण क्रमांक 320/2025 में यह फैसला आठ अक्टूबर को सुनाया गया।
अभियोजन के अनुसार मृतका वर्षा रजक का विवाह दो दिसंबर 2022 को सुनील रजक से हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद आरोपी द्वारा दहेज और संपत्ति की मांग को लेकर वर्षा को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप था। 30 जनवरी 2025 को वर्षा ने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सूचना मिलने पर बैरागढ़ थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की और बाद में आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ने पैरवी की। अभियोजन ने मृतका के मायके पक्ष के श्यामलाल, नर्मदाबाई, प्रदीप कुमार, पूजा, सुरेश, प्रीति रजक और राहुल सहित अन्य गवाहों के बयान कराए। गवाहों ने मृतका को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात न्यायालय में बताई।
अभियोजन ने चिकित्सा संबंधी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। चिरायु अस्पताल के चिकित्सक बीके दुबे तथा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिकल ऑफिसर डॉ. आदित्य सक्सेना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखे गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फांसी लगाए जाने से होना बताया गया था।
न्यायालय ने गवाहों के कथनों और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत दहेज मृत्यु के अपराध में 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 85 के तहत तीन वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इसी तरह दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 4 के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। धारा 3 के जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर छह माह और धारा 4 के जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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