तरनतारन , जून 18 -- खडूर साहिब विधानसभा क्षेत्र के गांव वेईं पूईं में एक दलित परिवार के घर को आग लगाये जाने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
आयोग ने मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार नोटिसों का जवाब नहीं दिये जाने पर जिला पुलिस प्रमुख को तीसरा और अंतिम सख्त जवाब-तलब नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।
आयोग द्वारा इससे पहले 20 अप्रैल, सात मई और आठ जून 2026 को नोटिस भेजे गये थे, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद आयोग ने 18 जून को अंतिम चेतावनी जारी की है।
इस मामले में पीड़ित दलित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने गुरुवार को प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग के मुख्य नोटिस और उसके बाद भेजे गये तीन रिमाइंडरों का जवाब न देना यह दर्शाता है कि संबंधित अधिकारियों के पास मामले में अपनी कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
ब्रह्मपुरा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र का एक सत्ताधारी नेता निजी राजनीतिक हितों के चलते प्रशासन पर दबाव बना रहा है, जिसके कारण मामले में निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कानून और तथ्यों के आधार पर अपना दायित्व निभाएं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अंततः अधिकारियों को ही जवाबदेह ठहराया जाएगा, इसलिए किसी भी प्रकार की कानूनी अनियमितता से बचना चाहिए।
पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने अब तक पीड़ित दलित परिवार को अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मिलने वाला कानूनी मुआवजा भी जारी नहीं किया है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के समान बताते हुए तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि उनका परिवार हमेशा दलितों, गरीबों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(8) के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दीवानी अदालत जैसी शक्तियां प्राप्त हैं। यदि निर्धारित सात दिनों के भीतर प्रशासन संतोषजनक और न्यायसंगत रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है, तो आयोग संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकता है तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन आयोग के अंतिम नोटिस की गंभीरता को समझते हुए मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
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