लखनऊ , अप्रैल 24 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब कृषि विकास का रास्ता एक जैसी नीति से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जरूरतों, जलवायु, जल उपलब्धता और स्थानीय फसली परिस्थितियों के अनुसार तय होगा। उन्होंने कहा कि दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, कृषि विविधीकरण और छोटे किसानों की आय बढ़ाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के अवसर पर शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में श्री चौहान ने कहा कि पूरे देश को पांच भागों में बांटकर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि राज्यों के साथ मिलकर खरीफ और रबी फसलों का व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने, कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और खेती को बाजार से जोड़ने पर आधारित है। छोटे किसानों के लिए इंटरक्रॉपिंग, फल-सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को अधिक उपयोगी बताया गया।

केंद्रीय मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और फार्मर आईडी को कृषि सुधार का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि हर पात्र किसान तक सस्ता कृषि ऋण पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों की जमीन, पशुधन और अन्य आवश्यक सूचनाएं एक मंच पर उपलब्ध होंगी, जिससे योजनाओं का लाभ तेज और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 'लैब टू लैंड' की अवधारणा को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीमों को गांव-गांव भेजेगी, जो किसान चौपाल के माध्यम से आधुनिक खेती, बेहतर बीज और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी देंगी। उत्तर प्रदेश में आलू किसानों को राहत देने के लिए एमआईएस योजना के तहत 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने की अनुमति दी गई है तथा आलू प्रसंस्करण के लिए इंटरनेशनल प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

श्री चौहान ने उर्वरक कीमतों पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों पर इसका बोझ नहीं आने दिया जाएगा। हाल ही में केंद्र सरकार ने 41 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है, जिससे यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराई जा सकेगी।

उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से धरती और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। इसी कारण प्राकृतिक कृषि मिशन शुरू किया गया है और संक्रमण काल में किसानों को प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।

नकली बीज, मिलावटी कीटनाशक और कृषि आदानों की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में कड़े प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को ठगने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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