नयी दिल्ली , फरवरी 24 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक कर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषि उन्नति योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
श्री चौहान ने बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि एक ओर केंद्र सरकार पीएम‑आशा के तहत रबी 2026 सीजन में चना, सरसों और मसूर की बड़े पैमाने पर खरीद कर किसानों को मजबूत मूल्य समर्थन दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों को उपलब्ध कराए गए फंड का हर रुपया समय पर और कुशलतापूर्वक किसानों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए। उन्होंने असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, उत्तराखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल, मध्य प्रदेश और हरियाणा राज्यों के साथ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषि उन्नति योजना की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि जैसे‑जैसे वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जो राशि दी गई है, उसका उपयोग समय पर, ठीक से और किसानों के हित में सर्वश्रेष्ठ ढंग से किया जाए।
श्री चौहान ने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे आवंटित धनराशि को तेजी से और पूर्ण रूप से व्यय करें, ताकि 31 मार्च तक पूरी राशि किसानों के कल्याण, कृषि अवसंरचना और उत्पादकता बढ़ाने में उपयोग हो सके। उन्होंने बताया कि कृषि उन्नति और आरकेवीवाई के तहत कुल 18 योजनाएं लागू हैं और केंद्र सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का ठोस लाभ गांव‑गांव और खेत‑खेत तक पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम‑आशा) के माध्यम से किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम‑आशा के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपीएस), बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) और मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) शामिल हैं, जिनका व्यापक उद्देश्य किसानों की कृषि उपज के लिए सुनिश्चित और लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना, उनकी आय की रक्षा करना और बाजार में उतार‑चढ़ाव के खिलाफ उनकी आजीविका को सुरक्षित रखना है।
उन्होंने बताया कि पीएसएस तब लागू की जाती है, जब अधिसूचित दलहन, तिलहन और खोपरा के बाजार मूल्य चरम कटाई अवधि के दौरान अधिसूचित एमएसपी से नीचे चले जाते हैं, ताकि किसानों को लाभकारी मूल्य दिया जा सके। रबी 2026 सीजन हेतु मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र में 7,61,250 टन, गुजरात में 4,13,250 टन, मध्य प्रदेश में 5,80,000 टन तथा राजस्थान में 5,53,000 टन चना खरीद की स्वीकृति दी गई है। इसी प्रकार रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत राजस्थान में 13,78,750 टन तथा गुजरात में 1,33,000 टन सरसों की खरीद को मंजूरी प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त रबी 2026 सीजन हेतु मध्य प्रदेश में 6,01,000 टन मसूर की खरीद के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया है। इन निर्णयों से संबंधित राज्यों के किसानों को एमएसपी पर बिक्री का भरोसा और बाजार में कीमतों में गिरावट के दौरान भी आय सुरक्षा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत वर्ष 2030‑31 तक केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से पूर्व‑पंजीकृत किसानों से अरहर, उड़द और मसूर की उनकी ओर से दी गई मात्रा के अनुसार खरीद की जाएगी। यह व्यवस्था किसानों को आश्वस्त बाजार और मूल्य उपलब्ध कराती है और देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को मजबूती देती है।
श्री चौहान ने दोहराया कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें उचित मूल्य दिलाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सतत प्रयासरत है। पीएम‑आशा, मूल्य समर्थन योजना, आरकेवीवाई, कृषि उन्नति योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन जैसे कदम मिलकर किसानों के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं और आने वाले समय में भी सरकार किसान हितैषी निर्णय जारी रखेगी।
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