दरभंगा , अगस्त 27 -- नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने के बाद नदियों में तेज प्रवाह तथा बिहार के कुछ हिस्सों में संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच दरभंगा जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है और सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं।अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) सलीम अख्तर ने कहा कि ग्लेशियर झील फटने का प्रभाव गंडक नदी से जुड़े कुछ जिलों में होने की बात सामने आई है, लेकिन दरभंगा में इसका कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क और सचेत रहने की अपील की।
श्री अख्तर ने बताया कि पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर के कुछ हिस्से तथा वैशाली के कुछ हिस्सों में इसका प्रभाव पड़ने की बात सामने आई है, जबकि दरभंगा फिलहाल इससे अछूता है।उन्होंने बताया कि जिले में जून से अक्टूबर तक नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाती है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिदिन नजर रखी जा रही है। बागमती एवं अधवारा समूह की नदियों सहित विभिन्न स्थानों पर जलस्तर की निगरानी की जा रही है।
अपर समाहर्ता ने कहा कि फिलहाल जिले की सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं और जलस्तर नियंत्रण में है। प्रशासन खतरे के निशान के अलावा पूर्व वर्षों में दर्ज उच्चतम प्रवाह स्तर पर भी नजर रख रहा है।
बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों के संबंध में उन्होंने बताया कि जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर जून से अक्टूबर तक लगातार कार्य किया जाता है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए दिन के साथ रात में भी पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है। तटबंधों पर सैंड बैग और जियोबैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा स्लुइस गेट के रखरखाव तथा पुल-पुलियों के वेंट की साफ-सफाई भी कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि जिले में जल संसाधन विभाग से संबंधित पांच इकाइयां कार्यरत हैं और कुल 11 तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है।
अपर समाहर्ता श्री अख्तर ने बताया कि फिलहाल एनडीआरएफ की टीम दरभंगा में मौजूद नहीं है, लेकिन बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य स्तर से एनडीआरएफ उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। वहीं, एसडीआरएफ के करीब 28 से 30 सदस्यीय दल को जिले में तैनात रखा गया है। यह दल पैठान कवई, मनीगाछी में आवासित है और आवश्यकता के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की पूर्व तैयारियों के तहत प्रशासन प्रत्येक वर्ष अनुदेश पुस्तिका तैयार करता है, जिसमें बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना शामिल होती है। वृद्ध, दिव्यांगजन और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित निकासी के लिए भी विशेष योजना तैयार की जाती है।
श्री अख्तर ने बताया कि निजी नाव मालिकों से करीब 190 नावों का निबंधन कराया जा चुका है। वर्ष 2024 की बाढ़ के दौरान 137 नावों का संचालन किया गया था। वर्तमान में भी तीन-चार प्रखंडों में आवश्यकता के अनुसार नावों का परिचालन किया जा रहा है।
वर्षापात की स्थिति के संबंध में उन्होंने बताया कि जिले में सामान्य वर्षापात की तुलना में करीब 53 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की जा रही है। फिलहाल दरभंगा कम वर्षापात वाले जिलों में शामिल है।
अपर समाहर्ता ने लोगों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क, सचेत और तैयार रहें। उन्होंने कहा कि जिला पदाधिकारी के निर्देशन में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है तथा बाढ़ नियंत्रण विभाग के अभियंता एवं कर्मी दिन-रात निगरानी कर रहे हैं।
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