दरभंगा, अप्रैल 13 -- बिहार में दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाब- दिग्घी, हराही और गंगासागर का राज्य सरकार की एजेंसी की ओर से सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाबों के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करने, कथित मिट्टी भराई, अतिक्रमण और अन्य निर्माण कार्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर आश्चर्य और गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित प्राधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

सोमवार को तालाब बचाओ अभियान बनाम बिहार सरकार समेत नौ अन्य के खिलाफ दायर रिट याचिका (सिविल) संख्या 362/2026 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि जिस प्रकार इन तालाबों को व्यवस्थित तरीके से भरा जा रहा है और उन पर अतिक्रमण हो रहा है, वह चिंताजनक है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तिथि दो मई, 2026 निर्धारित की है।

तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बताया कि 'तालाब बचाओ अभियान' की ओर से दायर यह याचिका जिसकी पैरवी प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्रा एवं उनके सहयोगी अधिवक्ता रेणु और अधिवक्ता स्वागत ने किया है। याचिका में अदालत से तत्काल हस्तक्षेप कर मिट्टी भराई एवं निर्माण कार्य पर रोक लगाने, अतिक्रमण हटाने और तालाबों को उनके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) सहित राज्य की एजेंसियां राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों की अनदेखी करते हुए तालाबों में मिट्टी भराई और निर्माण कार्य कर रही हैं, जिससे इनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

श्री चौधरी ने बताया कि रिट याचिका (सिविल) संख्या 362/2026 में तालाब बचाओ अभियान के द्वारा बिहार सरकार, जिलाधिकारी दरभंगा, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रेल मंत्रालय भारत सरकार, मंडल रेल प्रबंधक समस्तीपुर रेल मंडल, बिहार राज्य वेटलैंड अथॉरिटी, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक, शहरी विकास और गृह विभाग एवं बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम (बुडको) को प्रतिवादी बनाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए दो में को न्यायालय में जवाब देने को कहा है।

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