भोपाल/दतिया , जुलाई 12 -- मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का निर्णय लिया है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के चुनाव नहीं लड़ने से आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के लिए राजनीतिक संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं।
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद दतिया में पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम और पथराव की घटनाएं हुईं, जिनमें पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद प्रशासन ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी तथा कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दतिया जिले के संगठनात्मक ढांचे में डॉ. मिश्रा समर्थकों की अच्छी पकड़ है, जिससे पार्टी के सामने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज कर दी है और वरिष्ठ नेताओं को दतिया भेजकर कार्यकर्ताओं से संवाद किया जा रहा है।
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि डॉ. मिश्रा आशुतोष तिवारी के नामांकन और चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। स्वयं डॉ. मिश्रा ने भी पार्टी के निर्णय को स्वीकार करते हुए कहा है कि संगठन का फैसला सर्वोपरि है और नाराज कार्यकर्ताओं को समझाकर साथ लाया जाएगा।
इस बीच बसपा ने दतिया उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। दूसरी ओर सपा ने 'इंडिया' गठबंधन के तहत कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा के चुनाव मैदान से बाहर रहने का लाभ आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव को दलित और पिछड़ा वर्ग के मतों के रूप में मिल सकता है। दतिया विधानसभा सीट पर मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना तीन अगस्त को की जाएगी।
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