चेन्नई , अप्रैल 14 -- दक्षिण रेलवे ने मंगलवार को अपना 75वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर दक्षिण रेलवे की विकास यात्रा, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के उल्लेखनीय सफर को याद किया गया।
दक्षिण रेलवे ने इस समारोह को 'ट्रैक पर एक विरासत, दक्षिण की जीवनरेखा की सेवा और प्रगति के 75 वर्ष'के रूप में मनाया। चौदह अप्रैल, 1951 को गठित दक्षिण रेलवे का उदय तीन पूर्ववर्ती रेलवे प्रणालियों मद्रास और दक्षिणी महरत्ता रेलवे, दक्षिण भारतीय रेलवे और मैसूर राज्य रेलवे के विलय के माध्यम से हुआ था। यह एकीकरण स्वतंत्रता के बाद देश भर में प्रशासनिक रूप से कुशल और एकीकृत रेलवे जोन बनाने के प्रयासोंका हिस्सा था।
दक्षिण भारत में रेलवे की शुरुआत 1856 में हुई थी, जब रॉयपुरम से आरकोट (वालाजाह रोड) तक पहली ट्रेन चली थी। दशकों के दौरान, रेलवे के विस्तार ने वर्तमान तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ा। इसकी प्रमुख उपलब्धियों में 1899 में नीलगिरी माउंटेन रेलवे जैसे इंजीनियरिंग के चमत्कारऔर अप्रैल 2025 में भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट रेलवे समुद्र पुल 'न्यू पम्बन ब्रिज' का उद्घाटन शामिल है।
यह जोन डॉ. एमजीआर चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एगमोर, रॉयपुरम स्टेशन (भारत का सबसे पुराना स्टेशन) और यूनेस्को सूचीबद्ध नीलगिरी माउंटेन रेलवे जैसी प्रतिष्ठित विरासतों का संरक्षक है।
वर्तमान में दक्षिण रेलवे तमिलनाडु, केरल, पुड्डुचेरी और कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में सेवा प्रदान कर रहा है। यह 5100 किलोमीटर से अधिक के मार्ग पर संचालित होता है और इसके छह प्रमुख मंडल चेन्नई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली, सलेम, पलक्कड़ और तिरुवनंतपुरम हैं।
स्थापना के बाद के दशकों में दक्षिण रेलवे ने गेज परिवर्तन और विद्युतीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। वर्तमान में यह जोन 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और इसके 97 प्रतिशत से अधिक मार्गों का विद्युतीकरण हो चुका है।
आधुनिकीकरण के दौर में, वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों से लेकर किफायती अमृत भारत एक्सप्रेस तक की शुरुआत की गयी है। साथ ही, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है।आज दक्षिण रेलवे अपनी विरासत और नवाचार के बीच संतुलन बनाते हुए आधुनिकीकरण में सबसे आगे खड़ा है। 1856 की पहली भाप इंजन यात्रा से लेकर आज के आधुनिक रेल नेटवर्क तक, दक्षिण रेलवे इस क्षेत्र की जीवनरेखा बना हुआ है।
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