नयी दिल्ली , जनवरी 30 -- दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सभा के उपाध्यक्ष ली हैक-यंग के नेतृत्व में भारत आये एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को संसद भवन में राज्यसभा उपाध्यक्ष हरिवंश से मुलाकात की।
श्री हरिवंश ने इस दौरान कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया सशक्त और प्रगतिशील लोकतंत्र हैं और संसदीय आदान-प्रदान की एक मजबूत परंपरा साझा करते हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में लगातार वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के बहुआयामी स्वरूप पर श्री हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया व्यापार और निवेश, रक्षा, संस्कृति और जन-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ साझेदारी साझा करते हैं। यह लोकतंत्र, कानून के शासन, वैश्विक शांति और समृद्धि के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
श्री हरिवंश ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और कोरिया अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और गिम्हे के राजा किम सूरो के बीच वैवाहिक गठबंधन के माध्यम से जुड़े हुए हैं। यह दोनों राष्ट्रों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 2011 में दक्षिण कोरिया गणराज्य की सरकार ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में सियोल में उनकी प्रतिमा स्थापित की।
श्री हरिवंश ने याद दिलाया कि गुरुदेव टैगोर ने 1929 में 'पूर्व का दीपक' कविता लिखी थी। इसमें उन्होंने कोरिया के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। इसे कोरियाई लोग आज भी स्नेहपूर्वक याद करते हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में निरंतर बढ़ोत्तरी पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कि द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हुंडई, सैमसंग और एलजी देश में घर-घर में जाने-माने नाम बन गए हैं।
साझा दृष्टिकोण को ठोस कार्रवाई में बदलने में सांसदों की भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कोरियाई प्रतिनिधिमंडल को संसदीय सहयोग को मजबूत करने में अपने पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर संवाद और आदान-प्रदान से भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों की पूरी क्षमता का एहसास होगा ।
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