प्रिटोरिया , मार्च 11 -- दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री ने बुधवार को कहा कि उन्होंने नये अमेरिकी राजदूत को उनकी 'गैर-राजनयिक टिप्पणियों' पर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है। यह विवाद दक्षिण अफ्रीका की नस्लीय नीतियों एवं अदालती फैसलों पर राजदूत की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ है।

कंजर्वेटिव दूत ब्रेंट बोझेल ने पिछले महीने ही अपना पद संभाला है। दक्षिण अफ्रीका के अमेरिकी सहयोगी इजरायल के खिलाफ नरसंहार का मामला दर्ज कराने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के श्वेत अफ़्रीकी प्रताड़ित किये जा रहे हैं, के विवादित दावों के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में पहले से ही दरार आ चुकी है।

मंगलवार को अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में नये राजदूत ने रंगभेद काल के नारे 'किल द बोअर, किल द फार्मर' को 'हेट स्पीच' करार दिया और अश्वेत दक्षिण अफ्रीकियों को सशक्त बनाने वाली नीतियों की आलोचना की।

विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने पत्रकारों से कहा, "हमने अमेरिका के राजदूत, राजदूत बोझेल को उनकी गैर-राजनयिक टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है।"श्री ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में श्वेतों के नरसंहार के अपने निराधार दावों के समर्थन में इस नारे का इस्तेमाल किया है। पिछले साल मई में ह्वाइट हाउस में राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक में उन्होंने इसके वीडियो क्लिप भी दिखाये थे।

दक्षिण अफ्रीका में यह नारा विवादित है, लेकिन वहां की अदालतों ने फैसला सुनाया है कि यह 'हेट स्पीच' के दायरे में नहीं आता। अदालतों का मानना है कि इसे 1994 में समाप्त हुए श्वेत-अल्पसंख्यक शासन के खिलाफ संघर्ष के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मंगलवार को व्यापारिक नेताओं की बैठक में श्री बोझेल ने कहा था, "मुझे खेद है, मुझे फर्क नहीं पड़ता कि आपकी अदालतें क्या कहती हैं, यह हेट स्पीच है।"बुधवार को नये दूत अपने बयान से पीछे हटते नजर आये। उन्होंने 'एक्स' पर कहा, "मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि भले ही मेरी निजी राय कई दक्षिण अफ्रीकियों की तरह यही है कि 'किल द बोअर' हेट स्पीच है, लेकिन अमेरिकी सरकार दक्षिण अफ्रीका की न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसके फैसलों का सम्मान करती है।"मंगलवार के संबोधन में बोझेल ने दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत आर्थिक सशक्तीकरण नीतियों की भी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि इससे निवेश में कमी आ सकती है और उन्होंने वर्तमान नीतियों की तुलना रंगभेद के दौर के नस्लीय कानूनों से कर दी।

श्वेत-समर्थक लॉबी समूहों के भ्रामक आंकड़ों और 'उल्टे' भेदभाव के झूठे दावों को दोहराते हुए उन्होंने दावा किया कि रंगभेद के दौर में अश्वेत दक्षिण अफ्रीकियों के खिलाफ 147 नस्लीय कानून थे और आज लगभग उतने ही कानून श्वेतों के खिलाफ हैं।

इसके जवाब में श्री लामोला ने कहा, "हम फिर से दोहराते हैं कि बड़े पैमाने पर अश्वेत आर्थिक सशक्तीकरण कोई उल्टा भेदभाव या नस्लवाद नहीं है जैसा राजदूत ने अफसोसजनक रूप से संकेत दिया है।"उन्होंने आगे कहा, "यह दक्षिण अफ्रीका के अनूठे इतिहास के संरचनात्मक असंतुलन को ठीक करने के लिए बनाया गया एक मौलिक तंत्र है। यह एक संवैधानिक अनिवार्यता है, जिसे दक्षिण अफ्रीकी सरकार कभी नहीं छोड़ सकती और न ही छोड़ेगी।"श्री लामोला ने कहा, "बोझेल हमें फिर से नस्लीय आधार पर ध्रुवीकृत समाज की ओर न धकेलें। एक मेहमान के रूप में उनकी भूमिका हमें एक राष्ट्र बनाने में सहयोग देने की है।"अमेरिकी दक्षिणपंथ के जाने-माने चेहरे श्री बोझेल 'मीडिया रिसर्च सेंटर' के संस्थापक हैं। यह एक गैर-लाभकारी समूह है, जो 'राष्ट्रीय समाचार मीडिया के वामपंथी झुकाव को सामने लाने और उसका मुकाबला करने' का दावा करता है।

1990 में जब नेल्सन मंडेला रंगभेद के खिलाफ अपनी लड़ाई के कारण जेल से रिहा होने के बाद अमेरिका के दौरे पर थे, तब श्री बोझेल के संगठन ने मीडिया की इस बात के लिए आलोचना की थी कि उसने श्री मंडेला को कभी 'विध्वंसक' या आतंकवादी नहीं कहा।"अक्टूबर में सीनेट की सुनवाई के दौरान श्री बोझेल ने इस टिप्पणी को यह कहकर सही ठहराया कि उस समय मंडेला की पार्टी अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस का झुकाव 'सोवियत संघ' की तरफ था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज दक्षिण अफ्रीका में श्री मंडेला ही वह व्यक्ति हैं, जिनके लिए उनके मन में 'सबसे अधिक सम्मान' है।

श्री बोझेल ने यह भी कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका सरकार पर इजरायल के खिलाफ नरसंहार का मामला खत्म करने के लिए दबाव डालेंगे और श्वेत अफ्रीकी अल्पसंख्यक समुदाय को शरणार्थी का दर्जा देने के श्री ट्रंप के प्रस्ताव को आगे बढ़ायेंगे।

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