नयी दिल्ली , सितंबर 19 -- दिल्ली सरकार ने दक्षिणी रिज की करीब 1,000 एकड़ (400 हेक्टेयर) अतिरिक्त भूमि को आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करने की स्वीकृति दे दी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले के बाद दिल्ली में अधिसूचित रिज क्षेत्र बढ़कर करीब 13,000 एकड़ (5,250 हेक्टेयर) हो जायेगा। सरकार के अनुसार इस कदम का उद्देश्य दिल्ली के हरित आवरण, जैव विविधता और पर्यावरणीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा कि यह निर्णय भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत लिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली रिज राजधानी की प्राकृतिक विरासत और उसका हरित सुरक्षा-कवच है। रिज का संरक्षण केवल पेड़ों और वन क्षेत्र को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध स्वच्छ हवा, जैव विविधता, तापमान संतुलन और पर्यावरणीय सुरक्षा से भी है। उन्होंने कहा कि सरकार पात्र रिज क्षेत्रों को स्थायी वैधानिक संरक्षण देने के साथ क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक क्षेत्रों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन पर भी ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि रिज के विभिन्न क्षेत्रों की अंतिम अधिसूचना की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी, जिसे सरकार ने प्राथमिकता देते हुए गति दी है। अरावली पर्वत श्रृंखला के विस्तार के रूप में दिल्ली रिज राजधानी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक हरित क्षेत्रों में शामिल है। दक्षिणी रिज अरावली की उत्तरी छोर की महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कड़ी है और जैव विविधता संरक्षण, धूल नियंत्रण तथा स्थानीय तापमान संतुलन में भूमिका निभाता है। सरकार के अनुसार, रिज वर्किंग प्लान के अनुरूप देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने, क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्जीवन और आक्रामक प्रजातियों के वैज्ञानिक प्रबंधन का काम भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के विकास के साथ उसकी प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है और करीब 13,000 एकड़ रिज का संरक्षण राजधानी की हवा, जैव विविधता तथा पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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