दंतेवाड़ा , जुलाई 15 -- छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 54 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही सीमेंट कंक्रीट सिंचाई नहर मानसून की पहली ही बारिश में कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों और किसानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जल संसाधन विभाग तथा ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बालुद के केवरामुंडापारा में उद्वहन सिंचाई योजना के नवीनीकरण के तहत लगभग 200 मीटर लंबी सीमेंट कंक्रीट नहर का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना की लागत 54 लाख रुपये आयी है। योजना के माध्यम से 82 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने तथा लगभग 150 किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लगातार हो रही बारिश के दौरान नहर का एक हिस्सा धंस गया, जबकि कई स्थानों पर दरारें भी दिखाई दीं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय ही गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उनका आरोप है कि कंक्रीट डालने के दौरान वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया, जिससे निर्माण पर्याप्त मजबूत नहीं हो सका। किसानों का दावा है कि कई हिस्सों में निर्धारित मोटाई से कम कंक्रीट डाली गई और सीमेंट की मात्रा भी कम रखी गई। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि कुछ स्थानों पर पशुओं के चलने से भी कंक्रीट उखड़ रही है।
इस संबंध में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आरके बेग ने कहा, "नहर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है. अंतिम भुगतान भी नहीं किया गया है।" उन्होंने बताया कि विभाग के अनुसार भारी बारिश से मिट्टी धंसने के कारण नहर का एक हिस्सा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा, "जिस जगह नुकसान हुआ है, वहां सीढ़ीनुमा पक्का स्ट्रक्चर बनाने का प्रस्ताव है। इससे बारिश और बाढ़ का पानी आसानी से निकल सकेगा।"फिलहाल नहर के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है, जबकि ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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