दंतेवाड़ा , अप्रैल 16 -- ) छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में नागरिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में दो महत्वपूर्ण पहलें एक साथ आगे बढ़ रही हैं। एक ओर प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए जिला स्तरीय बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। वहीं दूसरी ओर जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप डाइट दंतेवाड़ा में 10 से 14 अप्रैल तक आयोजित पाँच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण में जिले के चारों विकासखंडों से ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप (बीआरजी) के सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में बच्चों के समग्र विकास पर जोर देते हुए भाषा, गणितीय क्षमता, रचनात्मकता, नैतिकता और संवेदनशीलता के विकास को केंद्र में रखा गया। योग, खेल, कला और नैतिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रशिक्षण में पंचकोश आधारित समग्र विकास की अवधारणा को भी शामिल किया गया, जिससे शिक्षा को बौद्धिक स्तर से आगे बढ़ाकर शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास से जोड़ा जा सके। राज्य स्तर के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स और अकादमिक स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। प्रशिक्षित बीआरजी सदस्य आगामी 2 जून से विकासखंड स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जिले के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत स्व-गणना प्रक्रिया 16 से 30 अप्रैल तक प्रारंभ कर दी गयी है। नागरिक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार और मकान से संबंधित जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। एक बार जानकारी सबमिट होने के बाद उसमें संशोधन संभव नहीं होगा, इसलिए सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करने की अपील की गई है।
स्व-गणना पूरी करने वाले परिवारों को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा। 1 से 30 मई के बीच प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे, जिसके दौरान इस आईडी का उपयोग किया जाएगा। जनगणना विभाग ने सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1855 भी जारी किया है।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने नागरिकों से स्व-गणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और सही जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि जनगणना कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
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