दंतेवाड़ा , नवंबर 02 -- छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बावजूद बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमा पर बसे करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीण आज भी आवागमन के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

बीजापुर जिले के मांगनार गांव के समीप गुडरा नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण ग्रामीण पिछले सात-आठ वर्षों से बांस, पत्थरों और पुराने बिजली के खंभों की मदद से अस्थायी पुल बनाकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों से आज मिली जानकारी के अनुसार गुडरा नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में नदी का जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीण हर वर्ष सामूहिक श्रमदान कर अस्थायी पुल तैयार करते हैं।

अस्थायी पुल के निर्माण के लिए ग्रामीण पहले नदी के भीतर बांस से गोलाकार ढांचे तैयार करते हैं। इसके बाद इन ढांचों में बड़े-बड़े पत्थर भरकर अस्थायी आधार बनाए जाते हैं। इन्हीं आधारों के ऊपर पुराने बिजली के खंभे बिछाकर नदी पार करने के लिए रास्ता तैयार किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था पिछले करीब सात वर्षों से लगातार अपनाई जा रही है।

जानकारी के अनुसार इस अस्थायी पुल से मांगनार, कौशलनार सहित आसपास के करीब दो दर्जन गांवों के लोग आवागमन करते हैं। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को दैनिक आवश्यकताओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कार्यों के लिए दंतेवाड़ा जिले के बारसूर पर निर्भर रहना पड़ता है।

मांगनार पंचायत से बीजापुर जिला मुख्यालय की दूरी करीब 150 किलोमीटर है, जबकि दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में गुडरा नदी पर स्थायी पुल का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।

बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित होता है। विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है।

मांगनार गांव के सरपंच मनकू राम कश्यप ने बताया कि गुडरा नदी पर स्थायी पुल निर्माण के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। क्षेत्रीय विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक मांग पहुंचाई गई है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि नदी का पानी कम होने के बाद ग्रामीणों को प्रतिवर्ष अपने प्रयासों से अस्थायी पुल बनाना पड़ता है, जिससे आसपास के गांवों का आवागमन जारी रह सके।

ग्रामीणों ने वर्ष 2025 में भी अस्थायी पुल निर्माण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। इसके बावजूद स्थायी पुल निर्माण की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशभर में विकास और उपलब्धियों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं बस्तर के इस सीमावर्ती क्षेत्र में स्थायी पुल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव ग्रामीण विकास और दूरस्थ अंचलों में संपर्क व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

क्षेत्र के ग्रामीणों ने राज्य सरकार से गुडरा नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग करते हुए कहा है कि इससे करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकेगी।

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